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अगले 50 सालों में कैसे टेढ़े रास्ते से बचकर परस्पर लाभ व साझी जीत प्राप्त करेंगे चीन और ईयू

वर्तमान वर्ष चीन और यूरोपीय संघ के बीच राजनयिक सम्बंध की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ है और संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 80वी वर्षगांठ है। चीन-ईयू सम्बंध फिर महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कड़ी पर आ गये हैं। 24 जुलाई को चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पेइचिंग में 25वें चीन-ईयू शिखर समिट में भाग लेने के लिए आये यूरोपीय परिषद और यूरोपीय कमीशन  के नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने भावी चीन-ईयू सम्बंध के विकास के लिए तीन सूत्रीय सुझाव पेश किये, जिनमें पारस्परिक सम्मान पर कायम रहकर साझेदारी मजबूत करना, खुलेपन व सहयोग पर कायम रहकर मतभेद का समुचित निपटारा करना और बहुपक्षवाद पर कायम रहकर अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की सुरक्षा करना शामिल है। यूरोपीय पक्ष के नेताओं ने शी से प्रस्तुत सुझाव को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

चीनी रनमिन विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय सम्बंध कॉलेज के अध्यक्ष वांग यीवेइ ने सीएमजी के संवाददाता को बताया कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग के तीन सुत्रीय सुझावों ने चीन और ईयू को सहयोग पर फोकस रखकर वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन दिया है और भावी 50 वर्षों में अधिक उज्ज्वल चीन-ईयू सम्बंध रचने के लिए प्रेरणात्मक शक्ति डाली है, जो पूरे विश्व के लिए खुशखबरी भी है।

विश्व के दूसरे और तीसरे आर्थिक समुदाय के नाते चीन और ईयू के बीच व्यापक समान हित हैं और दोनों के बीच मूल टक्कर नहीं है। चीन और ईयू ने सर्वांगीण रणनीतिक साझेदारी स्थापित की है। वे एक दूसरे के महत्वपूर्ण व्यापार व निवेश साथी हैं। पिछले साल दोनों पक्षों का व्यापार 7 खरब 85 अरब 80 करोड़ अमेरिकी डॉलर है और अब तक पारस्परिक निवेश की रकम 2 खरब 60 अरब अमेरिकी डॉलर है।

दो बड़े आर्थिक समुदाय के नाते चीन और ईयू के बीच आर्थिक व व्यापारिक संघर्ष निकलना सामान्य बात है। वार्ता से सवाल के समाधान का उपाय निकालना महत्वपूर्ण है। इस बार चीन ने उम्मीद जतायी कि दोनों पक्ष हरित व डिजिटल साझेदारी गहराएंगे और यूरोपीय पक्ष व्यापार व निवेश बाजार का खुलापन बनाए रखेगा और चीनी उद्यमों का यूरोप में निवेश करने के लिए बेहतर वाणिज्यिक वातावरण तैयार करेगा। यूरोपीय पक्ष के नेताओं ने कहा कि वे एक दूसरे की चिंताओं का उचित निपटारा करने और व्यापार व निवेश क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को तैयार हैं।

चीन यूरोपीय सम्बंध की दिशा पकड़ने के लिए वैश्विक दृष्टि की ज़रूरत भी है। विश्लेषकों के विचार में अमेरिका का पैरिस समझौते से हटने की पृष्ठभूमि में चीन और ईयू ने जलवायु परिवर्तन के संयुक्त बयान जारी किया। इसने विश्व के लिए नेतृत्वकारी भूमिका निभायी है।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) 

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