इंटरनेशनल डेस्क : चीन में नदियों और विभिन्न झीलों का कायापलट हो रहा है। इसके तहत जल की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ नदियों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। केंद्र सरकार और जल संसाधन मंत्रालय द्वारा इस दिशा में एक अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें वर्ष 2027 का लक्ष्य रखा गया है। इस अवधि में नदियों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के अलावा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र की गुणवत्ता में सुधार किया जाना है।
गौरतलब है कि चीन में पीली नदी और यांग्त्जी नदी जैसी बड़ी नदियां बहती हैं, इन दोनों नदियों को देश की मातृ नदी का दर्जा हासिल है। ऐसे में हज़ारों किमी. का सफर तय करने वाली ये नदियां चीनी नागरिकों के जीवन से भावनात्मक रूप से जुड़ी हुईं हैं। जाहिर है कि इनका संरक्षण करने और सुंदरता बनाए रखने के लिए सरकार गंभीर है। बता दें कि चीन में नदियों और झीलों को पर्यटन केंद्र के तौर पर भी विकसित किया गया है। जिन पर लगातार फोकस करते हुए जलीय पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
चीन ने नदियों और झीलों की स्थिति सुधारने और सुंदरता पर ध्यान देने के लिए कुछ समय पहले एक कार्य योजना का अनावरण किया था। जिसमें जलीय पारिस्थितिकी तंत्र की गुणवत्ता में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इससे पता चलता है कि चीन नदियों की स्थिति सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है। क्योंकि अगर नदियों का जल साफ होगा, पारिस्थितिकी बेहतर होगी तो इससे देश और दुनिया के जल पर्यावरण पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
कहा जा सकता है कि चीन एक बड़ी जनसंख्या और भौगोलिक लिहाज से विशाल देश होने के नाते अपनी जिम्मेदारी निभाने में लगा है। क्योंकि चीन जल संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। जिनका सही ढंग से इस्तेमाल होना आवश्यक है। चीन ने जो पहल जारी की थी उसके मुताबिक साल 2030 तक खूबसूरत नदियों और झीलों के निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति हासिल करने पर जोर दिया है। साथ ही वर्ष 2035 तक इस पहल को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि नदियों की सुंदर बनाने के लिए एक स्थिर स्रोत, अच्छा जल प्रवाह और पर्याप्त पारिस्थितिक जल इस्तेमाल करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए बहते जल वाली नदियों का लक्ष्य लगातार प्राप्त करना होगा। चीन इस संबंध में अच्छा काम कर रहा है।
इसके साथ ही, चीन ने नदियों के संरक्षण और प्रबंधन, नदी पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार और जल-संरक्षण करने वाले समाज के विकास को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त उपाय शुरू करने का ऐलान किया है।
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति और राज्य परिषद के सामान्य कार्यालय द्वारा इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनमें वर्ष 2035 तक बाढ़ रोकथाम क्षमता, जल संसाधनों के कुशल उपयोग, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वसनीय जल आपूर्ति और समग्र नदी पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण सुधार करने पर बल दिया गया है।
चीन द्वारा जल संसाधनों और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों से भारत जैसे देशों को सीखने की जरूरत है। क्योंकि नदियों और झीलों में जल की गुणवत्ता भारत में एक गंभीर चिंता का विषय है। उम्मीद है कि चीन का अनुभव अन्य देशों के काम आएगा।
(अनिल पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

