इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका की एक संघीय अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दक्षिण सूडान भेजे गए प्रवासियों के निर्वासन को अवैध करार दिया है। मेसाचुसेट्स स्थित यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के न्यायाधीश ब्रायन ई. मर्फी ने इस संबंध में आपात सुनवाई का आदेश देते हुए कहा कि अमेरिकी प्रशासन को इन प्रवासियों को हिरासत में बनाए रखना चाहिए और उन्हें जबरन निर्वासित नहीं किया जा सकता।
यह मामला तब सामने आया जब प्रवासियों के वकीलों ने अदालत को सूचित किया कि म्यांमा और वियतनाम जैसे देशों से आए कम से कम 12 लोगों को अफ्रीकी देश दक्षिण सूडान भेजे जाने की आशंका है। वकीलों ने इस पर गहरी आपत्ति जताई और कहा कि यह कदम न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है बल्कि अदालत के पूर्व आदेशों के भी खिलाफ है।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, पूर्व ट्रंप प्रशासन के दौरान एक विवादित नीति के तहत कुछ प्रवासियों को उनके मूल देशों के बजाय दक्षिण सूडान भेजा गया था, जबकि स्पष्ट अदालती निर्देश था कि निर्वासन से पहले हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।
जज मर्फी ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के अधिकार की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि प्रवासियों को यह मौका मिलना चाहिए कि वे यह साबित कर सकें कि उन्हें किसी तीसरे देश, विशेषकर संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में भेजने से उनकी जान को खतरा हो सकता है। गृह सुरक्षा विभाग ने इस फैसले पर अब तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अमेरिकी आव्रजन नीतियों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है, विशेषकर जब प्रवासियों की सुरक्षा और मानवाधिकारों की बात हो।
इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं का ध्यान भी खींचा है, जो लंबे समय से अमेरिका में “अनुचित निर्वासन” की नीतियों का विरोध करते रहे हैं। इस फैसले के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिकी प्रशासन आगे किस दिशा में कदम उठाता है और क्या यह मामला उच्च न्यायालयों तक पहुंचता है या नहीं।