Last Updated: September 21, 2026

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ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका की नाकाबंदी, कच्चे तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी

April 13, 2026

ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका की नाकाबंदी, कच्चे तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी

इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका द्वारा ईरान के बंदरगाहों पर नाकाबंदी लागू करने की घोषणा के बाद दुनिया भर के तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है। इस फैसले का असर कच्चे तेल की कीमतों पर तुरंत देखने को मिला, जहां शुरुआती कारोबार में अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमत करीब 8 प्रतिशत बढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल होने वाला ब्रेंट क्रूड भी लगभग 7 प्रतिशत महंगा होकर 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।

यह स्थिति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण पहले से ही तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। कुछ समय पहले तक ब्रेंट क्रूड करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, लेकिन संघर्ष बढ़ने के बाद यह कई बार 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। हालांकि हाल ही में शांति वार्ता की उम्मीदों के चलते कीमतों में थोड़ी गिरावट भी आई थी।

होर्मुज जलडमरूमध्य की अहमियत

ईरान के पास होर्मुज जलडमरूमध्य पर मजबूत पकड़ मानी जाती है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और ईरान जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी मार्ग के जरिए तेल निर्यात करते हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, नाकाबंदी का असर उन सभी जहाजों पर पड़ेगा, जो ईरान के बंदरगाहों से जुड़े हैं। हालांकि, जो जहाज सिर्फ अन्य देशों के बंदरगाहों के बीच यात्रा कर रहे हैं, उन्हें इस क्षेत्र से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।

जहाजों की आवाजाही पर असर

हाल के दिनों में खासकर युद्धविराम के बाद भी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सीमित रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, युद्धविराम के बाद अब तक 40 से ज्यादा व्यापारिक जहाज इस रास्ते से गुजरे हैं। लेकिन नई नाकाबंदी के बाद इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही और कम हो सकती है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता की बात है। इससे महंगाई बढ़ सकती है और कई देशों की आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ सकता है, जो अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करते हैं। भारत जैसे देश इस स्थिति से सीधे प्रभावित होंगे। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं।

 

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