
नेशनल डेस्कः दक्षिण अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए भारत और अफ्रीकी संघ के बीच होने वाला शिखर सम्मेलन स्थगित कर दिया गया है। यह सम्मेलन 28 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होना था। केंद्र सरकार ने गुरुवार को जारी बयान में इसकी जानकारी दी।
सरकार के मुताबिक, अफ्रीका के कई क्षेत्रों में इबोला संक्रमण के मामले सामने आए हैं। हाल ही में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के साउथ किवु प्रांत में नए संक्रमित मरीज मिले हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत और अफ्रीकी संघ ने आपसी सहमति से सम्मेलन को फिलहाल टालने का फैसला किया है। नई तारीखों की घोषणा दोनों पक्षों के बीच चर्चा के बाद की जाएगी।
भारत में अभी तक इबोला का कोई मामला नहीं
हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में अब तक इबोला वायरस का एक भी मामला सामने नहीं आया है। हालांकि एहतियात के तौर पर देशभर में निगरानी और स्वास्थ्य तैयारियों को बढ़ा दिया गया है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को हवाई अड्डों पर प्री-अराइवल और पोस्ट-अराइवल स्क्रीनिंग, क्वारंटाइन प्रोटोकॉल, केस मैनेजमेंट, रेफरल सिस्टम और लैब टेस्टिंग से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
कितना खतरनाक है इबोला वायरस?
इबोला वायरस की कई स्ट्रेन होती हैं। मौजूदा प्रकोप बुंडीबुग्यो वैरिएंट से जुड़ा बताया जा रहा है, जो जायर वैरिएंट जितना घातक नहीं माना जाता। इसके बावजूद विशेषज्ञों ने सतर्कता बरतने की सलाह दी है। 2014-2016 में पश्चिम अफ्रीका में फैली इबोला महामारी ने हजारों लोगों की जान ली थी, जिसकी याद आज भी लोगों के मन में ताजा है। ऐसे में सम्मेलन का स्थगन स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
इबोला के प्रमुख लक्षण
इबोला संक्रमण के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई देते हैं, जिसके कारण कई बार लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। इसके शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, थकान, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं। संक्रमण बढ़ने पर गले में खराश, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं होने लगती हैं। गंभीर मामलों में नाक, मसूड़ों या शरीर के अंदरूनी हिस्सों से असामान्य रक्तस्राव भी हो सकता है। इसलिए समय रहते पहचान और इलाज बेहद जरूरी माना जाता है।
कैसे फैलता है इबोला?
इबोला वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रवों के सीधे संपर्क से फैलता है। इसमें खून, पसीना, उल्टी, लार, मल और अन्य शरीर के तरल पदार्थ शामिल हैं। यह बीमारी हवा के जरिए नहीं फैलती, लेकिन संक्रमित मरीज की देखभाल के दौरान सावधानी न बरतने पर संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। यही वजह है कि स्वास्थ्यकर्मियों और यात्रियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।