Last Updated: September 27, 2026

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भारत की समुद्री ताकत का प्रदर्शन, हूती विद्रोहियों के इलाके से दो टैंकरों को सुरक्षित निकाला

August 10, 2026

भारत की समुद्री ताकत का प्रदर्शन, हूती विद्रोहियों के इलाके से दो टैंकरों को सुरक्षित निकाला

नई दिल्ली: समुद्री में भारतीय नौसेना ने अपनी सक्रियता और सहयोग के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। नौसेना के युद्धपोतों ने उच्च जोखिम वाले समुद्री क्षेत्र से कच्चे तेल ले जा रहे दो टैंकरों को सुरक्षित निकालने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। नौसेना के इस कदम से महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की हुई है।

नौसेना के अनुसार, भारत के आईएनएस त्रिशूल और आईएनएस आदित्य ने कच्चे तेल के टैंकर एमटी कम्पास और एमटी थालत्ता को बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य के संवेदनशील क्षेत्र से सुरक्षित पार कराया। बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। नौसेना द्वारा यह महत्वपूर्ण सहायता 9 और 10 अगस्त को सुनिश्चित की गई।

दरअसल बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से इसकी रणनीतिक अहमियत काफी अधिक है। क्षेत्र में बढ़े समुद्री सुरक्षा खतरों के बीच इस मार्ग से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के लिए जोखिम बढ़ा हुआ है। ऐसे में भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की मौजूदगी से भारतीय और मित्र देशों के वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित आवाजाही में महत्वपूर्ण मदद मिल रही है।

भारतीय नौसेना ने कहा कि वह महत्वपूर्ण ऊर्जा कार्गो के सुरक्षित पारगमन को सुनिश्चित करने और भारत के समुद्री हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। नौसेना की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब लाल सागर, अदन की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

इससे पहले नौसेना ने एक अलग जानकारी में बताया था कि समुद्री तैनाती को लेकर उसके जवान और युद्धपोत पूरी तरह सतर्क हैं व मिशन पर तैनात हैं। नौसेना के युद्धपोत किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार हैं। नौसेना के अनुसार, आईएनएस इम्फाल, आईएनएस त्रिशूल और आईएनएस आदित्य लगातार समुद्री सुरक्षा से जुड़े खतरों पर नजर रख रहे हैं। नौसेना की इन इकाइयों का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा से जुड़े किसी भी खतरे का मुकाबला करना, समुद्री यात्रियों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, महत्वपूर्ण कार्गो की आवाजाही को सुरक्षित बनाना और भारत के समुद्री हितों की रक्षा करना है।

भारतीय नौसेना की लगातार मौजूदगी से यह भी स्पष्ट है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र से लेकर लाल सागर और अदन की खाड़ी तक अपने समुद्री हितों और वैश्विक समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। बाब-अल-मंडेब के अलावा कई अन्य रणनीतिक समुद्री मार्गों पर भी बदलते सुरक्षा हालात पर भारतीय नौसेना की नजर बनी हुई है।

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