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जी20 शिखर सम्मेलन में कम विकसित देशों की आवाज बनेगा भारत

September 3, 2023

जी20 शिखर सम्मेलन में कम विकसित देशों की आवाज बनेगा भारत

नई दिल्ली: 9 से 10 सितंबर के बीच होने वाला नई दिल्ली जी20 शिखर सम्मेलन अब नजदीक है और इसे भारत को कम विकसित देशों की आवाज के रूप में स्थापित करने में सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में से एक के रूप में रेखांकित किया जा रहा है। दो दिनों के गहन विचार-विमर्श के बाद, जी20 शिखर सम्मेलन नई दिल्ली घोषणा के साथ समाप्त होगा, इसमें जलवायु परिवर्तन और जलवायु वित्त, गरीबी उन्मूलन में बहुपक्षीय विकास बैंकों (एमडीबी) की भूमिका, टिकाऊ विकास पर प्रगति, विकास लक्ष्य, तकनीकी परिवर्तन और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा और सबसे महत्वपूर्ण रूप से रूस-यूक्रेन संघर्ष के सामाजिक-आर्थकि परिणामजैसे मुख्य एजेंडा आइटम की रूपरेखा तैयार करने की उम्मीद है।

भारत ने खुद को ग्लोबल साउथ(कम विकसित देशों) की आवाज़ के रूप में स्थापित किया है। भारत ने ऐसे देशों के हितों की वकालत करने के लिए जी20 की अध्यक्षता के मंच का उपयोग किया है। जनवरी में हुए वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि ‘दुनिया संकट की स्थिति में है‘ और विकासशील देशों के नेताओं से कहा था कि ‘आपकी आवाज़ भारत की आवाज़ है‘ और ‘आपकी प्राथमिकताएं भारत की प्राथमिकताएं हैं। ’’

’’उन्होंने कहा था, ‘‘भारत ने हमेशा अपने विकासात्मक अनुभव को ग्लोबल साउथ के हमारे भाइयों के साथ साझा किया है। जैसा कि भारत इस वर्ष अपनी जी20 अध्यक्षता शुरू कर रहा है, यह स्वाभाविक है कि हमारा उद्देश्य वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को बढ़ाना है। भारत की जी20 की अध्यक्षता के लिए एक वाक्यांश, जो प्राचीन संस्कृत पाठ हितोपदेश से लिया गया है वसुधैव कुटुंबकम, या एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य है। सरकार ने अपनी विदेश नीति स्थापित करने के लिए लगातार इसका उपयोग किया है।

भारत का लक्ष्य जी20 के अध्यक्ष के रूप में मिले राजनयिक अवसर का अधिकतम उपयोग करना है और इसलिए लगभग सभी देशों ने आगामी जी20 शिखर सम्मेलन के लिए अपनी उपस्थिति की पुष्टि कर दी है। जी 20 समूह में वे देश शामिल हैं, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 80 प्रतिशत और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में 70 प्रतिशत से अधिक का योगदान करते हैं। जी20 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और कनाडाई प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो सहित लगभग 25 विश्व नेताओं की उपस्थिति होगी।

सूत्रों के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को छोड़कर लगभग सभी जी20 नेताओं ने नई दिल्ली जी20 शिखर सम्मेलन के लिए अपनी उपस्थिति की पुष्टि कर दी है। 28 अगस्त को पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ टेलीफोन पर बातचीत में नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने में असमर्थता जताई थी और बताया था कि रूस का प्रतिनिधित्व उनके विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव करेंगे। दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन 7 सितंबर को चार दिवसीय द्विपक्षीय यात्र पर आ रहे हैं, इस दौरान वह जी20 शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगे।

बहुपक्षीय कार्यक्रम में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की उपस्थिति की अभी पुष्टि नहीं हुई है। 11 अगस्त को इस बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रलय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था कि सरकार ने सभी प्रतिभागियों को आमंत्रित किया है और उनकी भागीदारी के लिए उत्सुक है। मेक्सिको के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उसके राष्ट्रपति एन्ड्रेस मैनुअल लोपेज़ ओब्रेडोर नहीं कर सकते हैं, और इसके अर्थव्यवस्था मंत्री रक़ेल ब्यूनरो सांचेज़ शिखर सम्मेलन में देश का प्रतिनिधित्व करने की संभावना है। शिखर सम्मेलन में आमंत्रित जी 20 सदस्य देशों की पूरी सूची यहां दी गई है।

ऑस्ट्रेलिया के प्रधान मंत्री एंथोनी अल्बानीज़, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति अल्बटरे फर्नांडीज, दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन, जापान के प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा, इटली के प्रधान मंत्री जियोजर्यिा मेलोनी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो, कनाडा के प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रडो, ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधान मंत्री मोहम्मद बिन सलमान, जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एदरेगन, यूनाइटेड किंगडम के प्रधान मंत्री ऋषि सुनक, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यूं सुक येओल और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन शामिल हैं।

बहुपक्षीय कार्यक्रम में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष चाल्र्स मिशेल भी भाग लेंगे। इसके अलावा, भारत ने उन नौ देशों के नेताओं को भी आमंत्रित किया है, जो जी20 समूह का हिस्सा नहीं हैं। ये हैं बांग्लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सिसी, मॉरीशस के प्रधान मंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ, नीदरलैंड के प्रधान मंत्री मार्क रूट, नाइजीरियाई राष्ट्रपति बोला अहमद टीनुबू, सिंगापुर के प्रधान मंत्री ली सीन लूंग, स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज़, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और सैय्यद असद बिन तारिक अल सईद, ओमान के उप प्रधान मंत्री और राज्य के प्रमुख सुल्तान हैथम बिन तारिक के निजी प्रतिनिधि।

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