इंटरनेशनल डेस्क: ईरान में बढ़ती महंगाई और कमजोर होती मुद्रा के विरोध में देशभर में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। बीते दो हफ्तों से जारी आंदोलन गुरुवार रात और तेज हो गया, जब निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने जनता से इस्लामिक शासन के खिलाफ खुलकर सड़कों पर उतरने की अपील की। इसके बाद कम से कम 50 शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन देखे गए।
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, पहलवी की अपील के बाद हजारों लोग रात करीब आठ बजे सड़कों पर उतरे और सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। प्रदर्शनकारियों ने इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ नारेबाजी के साथ-साथ रेजा पहलवी के समर्थन में भी आवाज बुलंद की जो ईरान में लंबे समय तक अकल्पनीय माना जाता रहा है।
BREAKING:
Huge crowds of anti-regime protesters out on the streets of Tehran tonight.
They are setting the cars and motorcycles of the Islamic regime’s security forces on fire pic.twitter.com/CKp1x5X1Ne
— Visegrád 24 (@visegrad24) January 8, 2026
हिंसा में 39 की मौत, हजारों हिरासत में
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों और हिंसा में अब तक 39 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,260 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। हालात पर काबू पाने के लिए सरकार ने सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी है और कई इलाकों में सख्ती की गई है।
इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं बंद
स्थिति बिगड़ती देख ईरानी प्रशासन ने देश के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं और टेलीफोन लाइनों को भी काट दिया गया है। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स के मुताबिक, लाइव डेटा से संकेत मिले हैं कि कई सर्विस प्रोवाइडर्स की कनेक्टिविटी ठप हो गई है, जिससे व्यापक स्तर पर इलाके ऑफलाइन हो गए हैं।
ट्रंप का बयान: ‘आवाज दबाई गई तो नहीं छोड़ेंगे’
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जनता के समर्थन में बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश की गई, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। गौरतलब है कि 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रेजा पहलवी अमेरिका चले गए थे, और उनके बेटे रेजा पहलवी तब से निर्वासन में हैं।
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पहलवी की चेतावनी
रेजा पहलवी ने अपने संदेश में कहा कि ईरान पर पूरी दुनिया की नजर है। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने की अपील की और इस्लामिक रिपब्लिक, उसके नेतृत्व तथा रिवॉल्यूशनरी गार्ड को चेतावनी दी कि जनता पर किए गए जुल्म का जवाब जरूर दिया जाएगा।
ईरान में मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि आर्थिक संकट ने राजनीतिक असंतोष को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

