इंटरनेशनल डेस्कः पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम (Ceasefire) को लेकर एक बहुत महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। पाकिस्तान इस बैठक को अपनी बड़ी कूटनीतिक परीक्षा मान रहा है, क्योंकि इसका असर पूरे पश्चिम एशिया (Middle east) पर पड़ सकता है।
कड़ी सुरक्षा के बीच हो रही है बैठक
इस्लामाबाद को पूरी तरह हाई अलर्ट पर रखा गया है। जहां बैठक होनी है, उस होटल को खाली करा लिया गया है।
यह सब इसलिए किया गया है क्योंकि हाल ही में सुरक्षा से जुड़े खतरे सामने आए थे, जैसे आत्मघाती हमले और अफगान सीमा से जुड़े जोखिम।
कौन-कौन नेता होंगे शामिल?
ईरान की तरफ से ईरान का प्रतिनिधिमंडल पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुका है। इसमें शामिल हैं सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव, संसद के स्पीकर, विदेश मंत्री। अमेरिकी टीम शुक्रवार को पहुंचेगी, जिसमें शामिल होंगे उप राष्ट्रपति, मिडिल ईस्ट के विशेष दूत, वरिष्ठ सलाहकार होंगे। शनिवार को इस्लामाबाद के एक बड़े होटल में आधिकारिक बातचीत होगी।
लेबनान बना सबसे बड़ा मुद्दा
इस बातचीत के बीच सबसे बड़ी परेशानी लेबनान की स्थिति है। इज़रायल लगातार लेबनान पर हमले कर रहा है। इज़रायली प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि अभी कोई सीज़फायर नहीं होगा। हाल के हमलों में सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों घायल हुए हैं। अमेरिका चाहता है कि इजरायल हमले कम करे ताकि ईरान के साथ बातचीत आसान हो सके, लेकिन हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं।
ईरान का सख्त रुख
वार्ता से पहले ईरान के सर्वोच्च नेता ने स्पष्ट कर दिया है। ईरान युद्ध नहीं चाहता। लेकिन अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा। अगर कोई हमला करेगा, तो जवाब जरूर मिलेगा। उन्होंने यह भी इशारा किया कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (एक अहम समुद्री रास्ता) को लेकर बड़ा फैसला ले सकता है।
किन मुद्दों पर बन सकती है सहमति?
इस बैठक में कुछ अहम मुद्दों पर बात हो सकती है।
जहां समझौता मुश्किल
अन्य मुद्दे:
क्या यह वार्ता शांति ला पाएगी?
यह बैठक सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच नहीं है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दोनों देश शांति चाहते हैं। लेकिन कोई भी हार मानने को तैयार नहीं है।
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