Last Updated: September 23, 2026

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Israel Iran War: जानें दोनों देशों में से किसकी करेंसी है सबसे ज्यादा मजूबत

February 28, 2026

Israel Iran War: जानें दोनों देशों में से किसकी करेंसी है सबसे ज्यादा मजूबत

इंटरनेशनल डेस्क: Israel और Iran के बीच हालात और गंभीर हो गए हैं। इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है। इजरायल के रक्षा मंत्री ने देशभर में विशेष आपातकाल लागू करने की घोषणा की है। इस तनाव के बीच अब दुनिया की नजर सिर्फ दोनों देशों की सैन्य ताकत पर ही नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति और मुद्रा की मजबूती पर भी है।

किसकी करेंसी ज्यादा मजबूत?

ताजा विनिमय दर के अनुसार, 1 अमेरिकी डॉलर लगभग 3.14 इजरायली न्यू शेकेल के बराबर है। वहीं ओपन मार्केट में 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 16,64,000 ईरानी रियाल के आसपास बताई जाती है। इन आंकड़ों से साफ है कि इजरायल की मुद्रा ईरान की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत मानी जाती है।

क्यों मजबूत है इजरायली न्यू शेकेल?

इजरायल की करेंसी की मजबूती के पीछे उसकी मजबूत और आधुनिक अर्थव्यवस्था है। इजरायल को दुनिया के प्रमुख टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी हब में गिना जाता है। यहां से बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट होता है और विदेशी निवेश लगातार आता रहता है। ग्लोबल कंपनियों द्वारा इजरायली स्टार्टअप्स और टेक कंपनियों में बड़े निवेश और अधिग्रहण से देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ा है। इससे इजरायली न्यू शेकेल को मजबूती मिली है।

फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व में बढ़त

इजरायल के पास लगभग 212.93 अरब डॉलर का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार है। यह रिजर्व आर्थिक संकट या वैश्विक अस्थिरता के समय देश की मुद्रा को स्थिर रखने में मदद करता है। इसके मुकाबले ईरान का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 127 अरब डॉलर आंका जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण इस रिजर्व का बड़ा हिस्सा आसानी से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

क्यों कमजोर है ईरानी रियाल?

ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रही है। खासकर तेल निर्यात और अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम तक सीमित पहुंच ने उसकी आर्थिक स्थिति को कमजोर किया है। विदेशी निवेश में भारी गिरावट आई है और कारोबार प्रभावित हुआ है। इसके अलावा ईरान में महंगाई दर काफी ऊंची है, जो करीब 48 प्रतिशत से ज्यादा बताई जाती है। लगातार बढ़ती महंगाई से स्थानीय मुद्रा की क्रय शक्ति घटती जाती है, जिससे रियाल की कीमत गिरती है।

पूंजी पलायन और डुअल एक्सचेंज रेट

ईरान को बड़े स्तर पर पूंजी पलायन का सामना करना पड़ रहा है। आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशक और कारोबारी अपना पैसा विदेश में लगाना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। इससे रियाल पर और दबाव बढ़ता है। साथ ही ईरान में दो तरह की विनिमय दर प्रणाली लागू है एक आधिकारिक दर और दूसरी बाजार दर। इससे आर्थिक असंतुलन पैदा होता है और मुद्रा में भरोसा कम होता है।

इजरायल की स्थिर अर्थव्यवस्था

इजरायल में नियंत्रित महंगाई, मजबूत बैंकिंग सिस्टम और निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था उसकी मुद्रा को स्थिर बनाए रखने में मदद करती है। टेक्नोलॉजी, डिफेंस और इनोवेशन सेक्टर में लगातार प्रगति के कारण इजरायली न्यू शेकेल को मध्य पूर्व की मजबूत मुद्राओं में गिना जाता है।

कुल मिलाकर मौजूदा हालात में इजरायल की आर्थिक स्थिति और मुद्रा ईरान की तुलना में कहीं ज्यादा स्थिर और मजबूत दिखाई देती है, जबकि ईरान को प्रतिबंधों और आंतरिक आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

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