इंटरनेशनल डेस्क: ईरान ने एक बड़े फैसले में इजरायल के लिए जासूसी करने के आरोपी कुरुश कीवानी को फांसी दे दी है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब इजरायल और अमेरिका के साथ तनाव बढ़ा हुआ है। कुरुश कीवानी पर आरोप था कि वह इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए काम कर रहा था।
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क्या आरोप लगे?
उस पर ईरान की सुरक्षा से जुड़ी बेहद गोपनीय जानकारी इकट्ठा करके उसे बाहर भेजने का आरोप था। जांच में यह भी सामने आया कि कीवानी ने ईरान के कई संवेदनशील और प्रतिबंधित इलाकों की तस्वीरें खींचीं और उन्हें मोसाद तक पहुंचाया। इन गतिविधियों को देश की सुरक्षा के खिलाफ गंभीर अपराध माना गया।कीवानी को पहले निचली अदालत ने देशद्रोह और जासूसी का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी।
सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद मिली फांसी
इसके बाद उसने फैसले को चुनौती दी, लेकिन ईरान का सुप्रीम कोर्ट ने भी सभी सबूतों की समीक्षा के बाद सजा को सही ठहराया। सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद जेल प्रशासन ने फांसी की सजा को लागू कर दिया। ईरान पहले भी ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाता रहा है और देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों में जासूसी को गंभीर अपराध मानता है।
ईरान के एक और शीर्ष अधिकारी की इजरायली हमले में मौत
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने पुष्टि की है कि उसके सचिव अली लारीजानी एक हमले में मारे गए हैं। ईरान की एक न्यूज एजेंसी ने बुधवार सुबह इस रिपोर्ट की जानकारी दी। एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, एक बयान में काउंसिल ने कहा कि लारीजानी की मौत मंगलवार सुबह हुई। उनके साथ उनके बेटे मोर्तेजा लारीजानी, काउंसिल के सचिवालय में सुरक्षा मामलों के उप-प्रमुख अलीरेजा बायात और कई अन्य लोग भी मारे गए।
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लारीजानी की लंबी सेवा की सराहना
एक अन्य न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, काउंसिल ने ईरान के विकास में लारीजानी की लंबी सेवा की सराहना की और बाहरी खतरों का सामना करने के लिए राष्ट्रीय एकता की अपील की। मंगलवार को, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल ने ईरान पर चल रहे हमलों में लारीजानी को मार गिराया है।

