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न्यायपालिका संविधान को दोबारा नहीं लिख सकती : Shehbaz Sharif

April 20, 2023

न्यायपालिका संविधान को दोबारा नहीं लिख सकती : Shehbaz Sharif

इस्लामाबादः देश में चल रहे संवैधानिक और राजनीतिक संकट के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने न्यायपालिका से अपनी भूमिका का पुनमरूल्यांकन करने और संविधान का रक्षक बनने का आग्रह किया है। शरीफ ने 1973 संविधान मोबाइल एप्लिकेशन के लॉन्च समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में कहीं भी ऐसा नहीं होता है कि कोई अदालत किसी कानून के खिलाफ स्थगन आदेश जारी करें, जो अभी भी बना हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च रखने के लिए संविधान को बनाए रखने के लिए राज्य संस्थानों को एकजुट होने का समय है। शरीफ का विचार है कि पाकिस्तान वर्तमान में संवैधानिक चुनौतियों के चौराहे पर है, जिसके लिए राज्य संस्थानों को आगे आने की आवश्यकता है। संविधान की जड़ें संसद में हैं और विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त अवधारणा के अनुसार, न्यायपालिका कानून की केवल व्याख्या कर सकती है, लेकिन इसे फिर से नहीं लिख सकती है। शरीफ ने कहा कि 1973 का संविधान सभी पृष्ठभूमि के राजनेताओं के कठिन परिश्रम का परिणाम था, जो पवित्र दस्तावेज के निर्माण में आम सहमति पर पहुंचे थे।

उन्होंने याद किया कि पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो, मुफ्ती महमूद, खान अब्दुल वली खान और कई अन्य राजनीतिक नेताओं सहित अपने समय के दिग्गज राजनेताओं ने अपने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एक ऐसा संविधान लिखा, जिसने महासंघ के लिए एक बाध्यकारी शक्ति के रूप में काम किया। शरीफ ने कहा कि हालांकि राजनेताओं ने अतीत में गलतियां की हैं, लेकिन अब उन्हें सुधारने का समय आ गया है। जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, शरीफ ने कहा, हमने वास्तव में एक सबक सीखा है और हम पाकिस्तान को इन समस्याओं से बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं।

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