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चीन और जर्मनी के विदेश मंत्रियों के बीच मुलाकात

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 8 दिसंबर को पेइचिंग में जर्मन विदेश मंत्री जोहान वेडेफुल के साथ मुलाकात की। इस मौके पर वांग यी ने कहा कि वर्तमान दुनिया में अव्यवस्था और उथल-पुथल तेज हो रही है। चीन और जर्मनी के बीच सहयोग न सिर्फ दोनों देशों के विकास, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के समान मुकाबले के लिए भी लाभदायक है। चीन और जर्मनी को बड़े देश की जिम्मेदारी उठाकर आपसी सम्मान के रवैये से और परिपक्व व सक्रिय इंटरेक्शन मॉडल और ज़्यादा स्थिर द्विपक्षीय नीतिगत ढांचा स्थापित करना होगा।

वांग यी ने कहा कि चीन जर्मनी के साथ उच्च स्तरीय आदान-प्रदान घनिष्ठ करना चाहता है, रणनीतिक संपर्क मजबूत करना चाहता है, विकास की रणनीति को जोड़ना चाहता है और व्यवहारिक सहयोग बढ़ाना चाहता है, ताकि चीन-जर्मनी संबंधों के विकास में नई उम्मीद जग सके। यूरोपीय संघ की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते जर्मनी यूरोपीय एकीकरण की मुख्य ताकत और चीन का महत्वपूर्ण साझेदार है। आशा है कि जर्मनी आपसी लाभ वाले सहयोग की सही दिशा में वार्ता के जरिए मतभेदों का समाधान करेगा।

इसके साथ ही वांग यी ने ऐतिहासिक, तथ्यात्मक और कानूनी दृष्टिकोण से थाईवान मुद्दे पर चीन के सैद्धांतिक रुख पर प्रकाश डाला। वांग यी ने कहा कि थाईवान से जुड़े जापान की वर्तमान नेता का गलत बयान बहुत खतरनाक है। जर्मनी के उलट, जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध के 80 साल बाद भी अपने आक्रामक इतिहास पर पूरी तरह से नहीं सोचा। एक चीन की नीति चीन और जर्मनी के बीच संबंधों का अहम राजनीतिक आधार है। आशा है कि जर्मनी चीन का कानूनी रुख समझने के साथ इसका समर्थन करेगा और थाईवान स्वतंत्रता संबंधी कथन का कड़ा विरोध करेगा।

वहीं, वेडेफुल ने कहा कि जटिल दुनिया में जर्मनी और चीन को विशेष जिम्मेदारी उठानी चाहिए। दोनों देश संपर्क और सहयोग मजबूत करने से एक-दूसरे के विश्वसनीय और पूर्वानुमान योग्य साझेदार बन सकते हैं। जर्मनी एक चीन की नीति का दृढ़ता से पालन करता है और चीन के साथ उच्च स्तरीय आदान-प्रदान के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहता है। दोनों पक्षों ने यूक्रेन संकट पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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