सियोल: उत्तर कोरिया और रूस के बीच रणनीतिक संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ गया है, जब दोनों देशों ने अपनी सीमा पर पहला सड़क संपर्क पुल बनाने की आधिकारिक घोषणा की। यह बहुप्रतीक्षित परियोजना न केवल बुनियादी ढांचे के विस्तार को दर्शाती है, बल्कि दोनों देशों के बीच मजबूत होते राजनीतिक और आर्थिक संबंधों का भी प्रमाण है।
जानकारी के अनुसार, यह पुल लगभग एक किलोमीटर लंबा होगा और इसके निर्माण में करीब 18 महीने का समय लगेगा। दूसरी ओर, उत्तर कोरिया की सरकारी एजेंसी ‘केसीएनए’ ने बताया कि यह पुल सीमा पार आवाजाही, पर्यटन और व्यापार को काफी हद तक सुगम बनाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते सहयोग का संकेत है, विशेषकर ऐसे समय में जब पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बीच दोनों देश वैकल्पिक साझेदारों की तलाश कर रहे हैं। उत्तर कोरिया की ओर से रूस को यूक्रेन युद्ध में अप्रत्यक्ष समर्थन देने की खबरें पहले ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर सुर्खियों में रही हैं।
इस परियोजना की शुरुआत का जश्न दोनों देशों के सीमावर्ती शहरों में एक साथ आयोजित समारोहों में मनाया गया। रूस के प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तीन और उत्तर कोरिया के प्रधानमंत्री पाक था सोंग ने वीडियो लिंक के माध्यम से शिरकत की। प्रधानमंत्री पाक ने इसे “द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक स्मारक” बताया, जो आने वाले वर्षों में सहयोग की नींव को और मजबूत करेगा।
गौरतलब है कि वर्तमान में रूस और उत्तर कोरिया के बीच एक रेलवे पुल और सीमित हवाई संपर्क पहले से मौजूद है, लेकिन यह नया ऑटोमोबाइल पुल टुमेन नदी पर स्थित होगा, जो रणनीतिक दृष्टि से रूस, चीन और उत्तर कोरिया की त्रिदेशीय सीमा के पास है।
इस पुल के माध्यम से न केवल वस्तुओं और लोगों की आवाजाही बढ़ेगी, बल्कि यह पूर्वोत्तर एशिया में परिवहन नेटवर्क के पुनर्गठन का संकेत भी हो सकता है। यह परियोजना दर्शाती है कि वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों के बदलते परिदृश्य में उत्तर कोरिया और रूस अपने सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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