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सीमा पर फिर भड़की आग: पाकिस्तान–अफगानिस्तान टकराव के पीछे क्या है वजह? जानें

Pakistan Afghanistan conflict

Pakistan Afghanistan conflict

Pakistan Afghanistan conflict: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा तनाव एक बार फिर खुली झड़प में बदल गया है। अफगान पक्ष का दावा है कि उसने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना की 19 से अधिक चौकियों पर कब्जा किया है। यह कार्रवाई उन हवाई हमलों के जवाब में बताई जा रही है, जिन्हें इस्लामाबाद ने हाल में “आतंकवादियों के ठिकानों” पर लक्षित बताया था। दोनों देशों के आरोप–प्रत्यारोप के बीच हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं।

पिछले वर्ष भी सीमा पर कई दौर की भारी गोलीबारी हुई थी। दोनों ओर से हताहतों के दावे किए गए और संघर्षविराम की कोशिशें टिकाऊ साबित नहीं हुईं। मौजूदा घटनाक्रम ने एक बार फिर उस पुराने विवाद को सतह पर ला दिया है, जिसकी जड़ें औपनिवेशिक दौर तक जाती हैं।

डूरंड लाइन: 130 साल पुराना विवाद
अफगानिस्तान–पाकिस्तान सीमा का सबसे संवेदनशील मुद्दा 1893 में खींची गई डूरंड लाइन है। ब्रिटिश भारत और अफगान अमीर के बीच तय इस 2,640 किमी लंबी रेखा ने पश्तून समुदाय को दो हिस्सों में बांट दिया।

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अफगानिस्तान ने ऐतिहासिक रूप से इस सीमा को औपचारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में स्वीकार नहीं किया है। दूसरी ओर, पाकिस्तान इसे अपनी वैध पश्चिमी सीमा मानता है। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे इलाकों में बड़ी पश्तून आबादी होने से यह मुद्दा केवल भू-राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और पहचान से जुड़ा सवाल भी बन गया है।

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP): तनाव का तात्कालिक कारण
दोनों देशों के बीच मौजूदा टकराव का मुख्य कारण TTP को माना जा रहा है। 2007 में बैतुल्लाह मेहसूद के नेतृत्व में कई उग्रवादी गुटों को मिलाकर बने इस संगठन का उद्देश्य पाकिस्तान में इस्लामी अमीरात स्थापित करना रहा है।

पाकिस्तान का आरोप है कि TTP लड़ाके अफगान क्षेत्र में पनाह लेकर वहां से हमले करते हैं। काबुल इन आरोपों से इनकार करता रहा है। नवंबर 2022 में TTP द्वारा संघर्षविराम तोड़े जाने के बाद हमलों में तेज़ी आई। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, 2024 में TTP से जुड़े सैकड़ों हमले दर्ज किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी और नागरिक हताहत हुए।

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तालिबान की वापसी के बाद बदला समीकरण
2021 में तालिबान के अफगानिस्तान में सत्ता में लौटने के बाद क्षेत्रीय समीकरण बदल गए। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि नई काबुल सरकार उसके सुरक्षा हितों को प्राथमिकता देगी, लेकिन TTP की बढ़ती सक्रियता ने इस उम्मीद को झटका दिया।

बढ़ता सैन्यीकरण और मानवीय चिंता
सीमा के दोनों ओर अतिरिक्त सैन्य तैनाती की खबरें हैं। बार-बार की झड़पों से सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों पर भी असर पड़ रहा है। स्कूल बंद, व्यापार बाधित और पलायन की आशंका बढ़ रही है।

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