इंटरनेशनल डेस्क: पाकिस्तान ने भारत और कनाडा के बीच हुए बड़े यूरेनियम समझौते को लेकर चिंता जताई है। 2 मार्च को भारत और कनाडा ने करीब 2.6 अरब डॉलर के यूरेनियम आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत कनाडा आने वाले वर्षों में भारत को यूरेनियम उपलब्ध कराएगा, जिससे भारत के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी CEPA पर बातचीत को भी तेज करने पर सहमति जताई है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस समझौते को लेकर एक आधिकारिक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान भारत और कनाडा के बीच हुए इस दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौते को चिंता की नजर से देख रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि दोनों देशों के बीच छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर और उन्नत परमाणु रिएक्टर तकनीकों पर संभावित सहयोग भी क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से चिंता का विषय है।
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पाकिस्तान ने अपने बयान में यह भी कहा कि यह समझौता नागरिक परमाणु सहयोग के क्षेत्र में एक विशेष व्यवस्था जैसा प्रतीत होता है। पाकिस्तान ने 1974 में भारत द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय इस्तेमाल किया गया प्लूटोनियम कनाडा द्वारा उपलब्ध कराए गए रिएक्टर से जुड़ा था।
Pakistan expresses ‘concern’ over Canada supplying Uranium to India, & reactor cooperation. Comes up with various claims. pic.twitter.com/ALDMD7rEEF
— Sidhant Sibal (@sidhant) March 5, 2026
पाकिस्तान के अनुसार, उसी घटना के बाद परमाणु सामग्री के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करने के लिए न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) की स्थापना की गई थी। पाकिस्तान का तर्क है कि जिस देश की वजह से वैश्विक नियंत्रण व्यवस्था बनी, उसे अब विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं।
पाकिस्तान ने यह भी सवाल उठाया कि भारत ने अपनी सभी नागरिक परमाणु सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सुरक्षा नियमों के तहत नहीं रखा है। भारत की कुछ परमाणु सुविधाएं अभी भी अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण से बाहर हैं और इस समझौते में परमाणु अप्रसार से जुड़े स्पष्ट और ठोस आश्वासन दिखाई नहीं देते।
पाकिस्तान ने आगे कहा कि इस तरह के समझौते से भारत की परमाणु क्षमता तेजी से बढ़ सकती है, जिससे दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। पाकिस्तान का मानना है कि इससे क्षेत्र में असमानता और बढ़ सकती है।
वहीं भारत और कनाडा के बीच हुए इस समझौते का उद्देश्य भारत के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए लंबे समय तक ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इस समझौते के तहत कनाडा की कंपनी Cameco भारत को वर्ष 2027 से 2035 के बीच करीब 22 मिलियन पाउंड यूरेनियम की आपूर्ति करेगी। इससे भारत को अपने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन के लिए स्थिर ईंधन आपूर्ति मिल सकेगी।
भारत ने वर्ष 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 100 गीगावॉट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बड़ी मात्रा में यूरेनियम की जरूरत होगी। इसी दिशा में यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा भारत और कनाडा छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर और उन्नत रिएक्टर तकनीकों के विकास पर भी मिलकर काम करेंगे। इन छोटे रिएक्टरों को भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ये बिजली ग्रिड को स्थिर रखने और साफ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं।
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