इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और संघर्ष ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। इसका असर हर देश पर पड़ा है, लेकिन पाकिस्तान में हालात ज्यादा खराब हो गए हैं। वहां की आम जनता इस संकट का सबसे ज्यादा बोझ उठा रही है। सरकार भी लोगों को राहत देने के बजाय टैक्स बढ़ा रही है और सब्सिडी कम कर रही है, जिससे मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी
पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल के दाम तेजी से बढ़े हैं। डीजल की कीमत लगभग 55% बढ़कर 520 रुपये प्रति लीटर हो गई है। पेट्रोल की कीमत करीब 43% बढ़कर 458 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी की वजह से लोग अब गाड़ियां कम इस्तेमाल कर रहे हैं। बस, ट्रक और ऑटो का किराया भी बढ़ गया है। माल ढुलाई महंगी होने से रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ गए हैं।
महंगाई दर में इजाफा
देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है। जनवरी में महंगाई दर 5.8% थी। अब बढ़कर 7.3% हो गई है। तेल और गैस महंगे होने से आयात (इम्पोर्ट) महंगा हो गया है, जिससे पाकिस्तानी रुपये पर दबाव बढ़ा है। इसका असर बिजली और ट्रांसपोर्ट के खर्च पर भी पड़ा है।
गैस और बिजली का संकट
ईंधन की कमी के कारण गैस और बिजली भी महंगी हो गई है। एलपीजी सिलेंडर की कीमत 2665 रुपये से बढ़कर 3500 रुपये हो गई है। बिजली के बिल में 1.62 रुपये प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई है। पहले से ही पाकिस्तान में बिजली महंगी थी, अब यह और ज्यादा महंगी हो गई है। इससे लोगों के लिए खाना बनाना और घर चलाना मुश्किल हो गया है।
खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़े
महंगाई का असर खाने-पीने की चीजों पर भी साफ दिख रहा है। आटे की कीमत में 35% तक बढ़ोतरी।
इन बढ़ती कीमतों ने खासकर मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है।
लोन लेना हुआ महंगा
आर्थिक स्थिति संभालने के लिए पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर बढ़ा दी है।
इससे होम लोन, बिजनेस लोन और पर्सनल लोन महंगे हो गए हैं। निवेश भी कम हो गया है, जिससे अर्थव्यवस्था पर और दबाव बढ़ रहा है।
सरकार के कदम
पाकिस्तान सरकार ने हालात सुधारने के बजाय कुछ ऐसे फैसले लिए हैं, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
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