Last Updated: September 20, 2026

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तस्करी मामला: हजारों में बिक रही जिंदा चींटियां, जानिए क्यों बढ़ रही है इनकी डिमांड

April 3, 2026

तस्करी मामला: हजारों में बिक रही जिंदा चींटियां, जानिए क्यों बढ़ रही है इनकी डिमांड

वायरल न्यूज: दुनिया में तस्करी के कई मामले सामने आते हैं, लेकिन हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सभी को हैरान कर दिया। मार्च महीने में केन्या के एक एयरपोर्ट पर चीन का एक व्यक्ति पकड़ा गया, जिसके बैग में करीब 2200 जिंदा चींटियां मिलीं। यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि आमतौर पर तस्करी सोना, ड्रग्स या वन्यजीवों की होती है, लेकिन यहां चींटियों की तस्करी हो रही थी।

क्यों बढ़ रही है चींटियों की डिमांड?

रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन और यूरोप के कुछ देशों में पूर्वी अफ्रीका की खास किस्म की चींटियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ये चींटियां केन्या, तंजानिया और इथियोपिया जैसे देशों में पाई जाती हैं। पहले तस्कर हाथी दांत या कीमती चीजों की तस्करी करते थे, लेकिन अब उन्होंने इन चींटियों को नया ‘कीमती सामान’ बना लिया है।

हजारों में है एक चींटी की कीमत

सबसे ज्यादा मांग ‘अफ्रीकी हार्वेस्टर’ प्रजाति की रानी चींटी की है। बताया जाता है कि एक रानी चींटी की कीमत करीब 220 डॉलर यानी लगभग 20–21 हजार रुपये तक होती है। यही वजह है कि तस्कर इन्हें पकड़कर विदेशों में बेच रहे हैं।

शौक बना बड़ी वजह

दरअसल, चीन और यूरोप में ‘एंट कीपिंग’ यानी चींटियां पालने का शौक तेजी से बढ़ रहा है। लोग इन चींटियों को कांच के डिब्बों या खास तरह के बॉक्स में रखते हैं, ठीक वैसे ही जैसे लोग मछलियों को एक्वेरियम में रखते हैं। इन बड़ी अफ्रीकी चींटियों की खास बात यह है कि वे अलग तरीके से अपने घर (कालोनी) बनाती हैं, जिसे देखना लोगों को दिलचस्प लगता है।

कैसे की जाती है तस्करी?

तस्कर इन चींटियों को बहुत चालाकी से छोटे प्लास्टिक या टेस्ट ट्यूब में भरकर भेजते हैं। इन्हें कूरियर के जरिए दूसरे देशों में भेजा जाता है। पार्सल पर ‘खिलौने’ या ‘डेकोरेशन आइटम’ लिख दिया जाता है। कई बार लोग इन्हें अपने बैग में भी ले जाते हैं। सुरक्षा जांच में ये आसानी से पकड़ में नहीं आतीं।

विशेषज्ञों की चेतावनी

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ अवैध कारोबार ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा है। इससे इन चींटियों की प्रजाति अपने मूल स्थान पर कम हो सकती है। दूसरे देशों में पहुंचकर ये तेजी से फैल सकती हैं। इससे स्थानीय जीव-जंतुओं और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ सकता है।

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