
इंटरनेशनल डेस्क: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद देश में हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। एक तरफ कुछ लोग सड़कों पर उतरकर इसे बदलाव और आज़ादी का मौका बता रहे हैं। वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में समर्थक अपने नेता के निधन पर शोक में डूबे हुए हैं।
बताया जा रहा है कि शनिवार को तेहरान में हुए हमले के दौरान खामेनेई की मौत हुई। इस घटना के बाद देशभर में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई इलाकों में लोग जश्न मनाते दिखाई दिए और कई जगहों पर मातम का माहौल है। यह स्थिति ईरान के भीतर गहरे राजनीतिक और सामाजिक मतभेदों को भी दिखाती है।
तेहरान और कुछ अन्य शहरों में शासन के विरोध में रहने वाले लोग सड़कों पर निकल आए। उनका कहना है कि लंबे समय से चले आ रहे सख्त शासन के बाद अब देश में बड़े बदलाव का रास्ता खुल सकता है। कुछ लोगों ने खुलकर खुशी जताई और इसे नए दौर की शुरुआत बताया। विदेशों में भी खासकर अमेरिका और ब्रिटेन के कुछ हिस्सों में कुछ समूहों ने इस घटना पर प्रतिक्रिया दी।

दूसरी ओर खामेनेई के समर्थकों में गहरा शोक है। कई जगहों पर लोग इकट्ठा होकर प्रार्थना और शोक सभाएं कर रहे हैं। सरकारी मीडिया चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के एंघेलाब स्क्वायर पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होकर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। वहां का माहौल बेहद भावुक और गंभीर बताया जा रहा है।

खामेनेई की मौत पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया। उन्होंने इसे ईरानी जनता के लिए अपने देश में बदलाव लाने का बड़ा अवसर बताया। ट्रंप ने कहा कि अब ईरान के साथ बातचीत का रास्ता पहले से आसान हो सकता है।
इस घटना का असर भारत में भी देखने को मिला। श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर कश्मीरी शिया समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इस हमले को मानवता और किसी भी देश की संप्रभुता पर हमला बताया। वहां मौजूद लोगों ने खामेनेई के निधन पर गहरा दुख जताया और इसे अपने लिए बड़ी क्षति बताया।
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