इंटरनेशनल डेस्क: रूस और यूक्रेन के बीच जारी लंबे संघर्ष के बीच रविवार को एक बार फिर मानवता की झलक देखने को मिली, जब दोनों देशों ने तीसरे चरण की बंदी अदला-बदली के तहत 303-303 सैनिकों को रिहा किया। यह सिलसिला शुक्रवार से चल रहा है, जब पहले 390-390 और फिर शनिवार को 307-307 कैदियों की अदला-बदली की गई थी।
इस ताज़ा रिहाई की पुष्टि रूसी रक्षा मंत्रालय ने की है। यह पहल ऐसे समय में हुई है जब यूक्रेन के कई इलाकों पर रूस द्वारा भारी ड्रोन और मिसाइल हमलों की सूचना मिल रही है। कीव, खारकीव, ओदेसा, ड्नीप्रो और अन्य शहरों पर हुए इन हमलों में कम से कम 12 लोगों की जान चली गई और कई घायल हुए हैं।
यूक्रेन की वायुसेना के प्रवक्ता यूरी इग्नाट ने बताया कि रूस ने हाल के दिनों में कुल 367 ड्रोन और मिसाइलें दागीं, जिनमें ईरान-निर्मित ‘शाहिद’ ड्रोन भी शामिल थे। उन्होंने इसे युद्ध के आरंभ से अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला करार दिया। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि रूस ने जानबूझकर नागरिक इलाकों को निशाना बनाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि हमलों में आवासीय इमारतें ध्वस्त हुईं और सैकड़ों परिवार बेघर हो गए। जेलेंस्की ने पश्चिमी देशों से रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की पुरानी मांग दोहराई।
यह कैदियों की अदला-बदली इस्तांबुल में हाल ही में हुई शांति वार्ता के बाद सामने आई है, जो दोनों देशों के बीच अब तक की कुछ सकारात्मक पहलुओं में गिनी जा रही है। वहीं, रूस ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रातभर में 110 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। हालांकि, मॉस्को की ओर से यूक्रेनी हमलों या अपनी सैन्य कार्रवाई को लेकर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की अदला-बदली भले ही छोटे कदम हों, लेकिन वे दोनों देशों के बीच संवाद के दरवाज़े खोलने में सहायक हो सकते हैं। युद्ध की विभीषिका के बीच यह पहल इंसानियत की उम्मीद को ज़िंदा रखती है।
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