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Russia ने कभी हमारे हितों को नुकसान नहीं पहुंचाया : S. Jaishankar

February 20, 2024

Russia ने कभी हमारे हितों को नुकसान नहीं पहुंचाया : S. Jaishankar

नई दिल्लीः विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूसी तेल खरीदने के भारत के फैसले का बचाव करना जारी रखा है। उन्होंने कहा कि मॉस्को ने कभी भी नई दिल्ली के हितों को नुकसान नहीं पहुंचाया है। दोनों देशों के बीच हमेशा स्थिर और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं।साल 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से, भारत रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है और अब यह मॉस्को के लिए कच्चे तेल का प्रमुख स्नेत है, जो इसके तेल आयात का लगभग 36 प्रतिशत है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 60वें म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान विदेश मंत्री ने जर्मन डेली हैंडेल्सब्लैट के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि भारत का रूस के साथ हमेशा स्थिर और मैत्रीपूर्ण संबंध रहा है। विदेश मंत्री ने भारत-रूस संबंधों के भारत-यूरोप संबंधों पर बोझ बनने के सवाल के जवाब में कहा, ‘हर कोई अपने पिछले अनुभवों के आधार पर रिश्ता निभाता है। अगर मैं आजादी के बाद भारत के इतिहास पर नजर डालूं तो रूस ने कभी भी हमारे हितों को नुकसान नहीं पहुंचाया है।’

विदेश मंत्री ने कहा, कि ‘मैं यह उम्मीद नहीं करता कि यूरोप चीन के बारे में मेरे जैसा दृष्टिकोण रखेगा, यूरोप को यह समझना चाहिए कि मैं रूस के बारे में यूरोपीय दृष्टिकोण के समान नहीं हो सकता। आइए हम स्वीकार करें कि रिश्तों में स्वाभाविक मतभेद हैं।‘ विदेश मंत्रालय ने यह साक्षात्कार मंगलवार को प्रकाशित किया है। दरअसल, जब यूक्रेन में लड़ाई शुरू हुई, तो यूरोप ने अपनी ऊर्ज खरीद का एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व में स्थानांतरित कर दिया, जो तब तक भारत और अन्य देशों के लिए मुख्य आपूर्तिकर्ता था।

उन्होंने कहा, कि ‘हमें क्या करना चाहिए था? कई मामलों में हमारे मध्य पूर्व आपूर्तकिर्ताओं ने यूरोप को प्राथमिकता दी क्योंकि यूरोप ने अधिक कीमतें चुकाईं। या तो हमारे पास कोई ऊर्ज नहीं होती क्योंकि सब कुछ उनके पास चला जाता। या हमें बहुत अधिक भुगतान करना पड़ता क्योंकि आप अधिक भुगतान कर रहे थे।‘ मंत्री ने दोहराया कि इसकी नीतियों से ऊर्ज बाजार में स्थिरता आई और वैश्विक तेल की कीमतों में वृद्धि को रोका गया, जो कम आय वाले देशों में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा होता।

एस जयशंकर ने आगे कहा, ‘अगर किसी ने रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदा होता और सभी ने दूसरे देशों से कच्चा तेल खरीदा होता, तो ऊर्ज बाजार में कीमतें और भी बढ़ जातीं। वैश्विक मुद्रास्फीति बहुत अधिक होती और कम आय वाले देशों में यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा होता।’ हैंडल्सब्लैट द्वारा यह उल्लेख किए जाने पर कि रूस भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण हथियार आपूर्तकिर्ता बना हुआ है, जयशंकर ने बताया कि ‘कई पश्चिमी देश लंबे समय से पाकिस्तान को आपूर्त िकरना पसंद करते रहे हैं।‘

हालांकि, उन्होंने कहा कि पिछले 10 या 15 वर्षों में भारत की नई खरीद के साथ चीजें बदल गई हैं, जो मुख्य आपूर्तकिर्ताओं के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, फ्रांस और इज़राइल के साथ विविध हो गई हैं। जयशंकर के अधिकांश विचार म्यूनिख में पैनल चर्चा, ग्रोइंग द पाई : सीजिंग शेयर्ड अपॉर्चुनिटीज में पहले ही कही गई बातों से मेल खाते हैं, जिसमें उन्होंने शनिवार को अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और अपने जर्मन समकक्ष एनालेना बेयरबॉक के साथ भाग लिया था।

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