इंटरनेशनल डेस्क: जापान की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। बता दें कि देश की संसद ने साने ताकाइची को पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में चुना है। 64 वर्षीय ताकाइची ने शिगेरु इशिबा का स्थान लिया, जिन्होंने दो बार चुनावी हार के बाद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) की नई नेता बनने के बाद संसद में हुए मतदान में ताकाइची ने बहुमत हासिल किया।
ताकाइची का उदय केवल जापानी राजनीति के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर महिला नेतृत्व की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने बिना किसी राजनीतिक पारिवारिक पृष्ठभूमि के राजनीति में प्रवेश किया और लगातार तीन दशकों की मेहनत के बाद देश की सर्वोच्च कार्यकारी पद तक पहुंच बनाई।
Japan’s parliament elects ultraconservative Sanae Takaichi as the country’s first female prime minister. Takaichi, head of the struggling Liberal Democratic Party, replaces Shigeru Ishiba, who resigned after two disastrous election losses. https://t.co/J9I7JA3ZUB
— The Associated Press (@AP) October 21, 2025
भारत-जापान संबंधों को लेकर पीएम मोदी का संदेश
ताकाइची को प्रधानमंत्री बनने पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा,
“साने ताकाइची को जापान की प्रधानमंत्री चुने जाने पर हार्दिक बधाई। भारत-जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए आपके साथ मिलकर कार्य करने को तत्पर हूं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हमारी साझेदारी शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।”
Heartiest congratulations, Sanae Takaichi, on your election as the Prime Minister of Japan. I look forward to working closely with you to further strengthen the India–Japan Special Strategic and Global Partnership. Our deepening ties are vital for peace, stability, and prosperity…
— Narendra Modi (@narendramodi) October 21, 2025
विदेश नीति में स्पष्ट रुख, QUAD की प्रबल समर्थक
ताकाइची विदेश नीति के क्षेत्र में पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की राह पर चलती नजर आती हैं। वह “स्वतंत्र और खुला हिंद-प्रशांत” दृष्टिकोण की पक्षधर हैं और अमेरिका तथा क्वाड देशों (भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान) के साथ गहरे सहयोग की हिमायती हैं। चीन और उत्तर कोरिया को लेकर उनका रुख काफी सख्त है, और उन्होंने जापान के रक्षा बजट को बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। वर्तमान में जापान अपने जीडीपी का लगभग 1.8% रक्षा पर खर्च करता है, जिसे आने वाले वर्षों में बढ़ाया जा सकता है।
जटिल चुनौतियों का सामना करेंगी नई प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री पद संभालते ही ताकाइची के सामने कई घरेलू और वैश्विक चुनौतियां होंगी। जापान की गिरती जनसंख्या, आर्थिक विकास की गति को पुनर्जीवित करना, और संसदीय समर्थन जुटाना उनकी प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी। संसद के दोनों सदनों में एलडीपी को बहुमत नहीं मिला है, इसलिए उन्हें स्थायी गठबंधन या विपक्षी समर्थन की दरकार रहेगी।
आर्थिक मोर्चे पर वे ‘आबेनॉमिक्स’ की समर्थक रही हैं जिसमें आक्रामक मौद्रिक नीतियां, सरकारी खर्च में वृद्धि और व्यापार उदारीकरण जैसे कदम शामिल हैं।
जानें कौन हैं साने ताकाइची?
साने ताकाइची का व्यक्तित्व राजनीति से परे भी खासा दिलचस्प है। एक समय वह हेवी मेटल ड्रमर और मोटरसाइकिल रेसिंग की शौकीन रह चुकी हैं। 1993 में अपने गृहनगर नारा से पहली बार सांसद चुनी गईं ताकाइची ने आंतरिक मामलों, आर्थिक सुरक्षा और लैंगिक समानता जैसे मंत्रालयों में अहम भूमिकाएं निभाई हैं।
वे ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर को अपना राजनीतिक आदर्श मानती हैं और अपने दृढ़ रवैये के लिए जानी जाती हैं। विदेश नीति में उनके विचारों को अक्सर ‘कट्टर राष्ट्रवादी’ कहा गया है, लेकिन यही रुख उन्हें एलडीपी की पारंपरिक विचारधारा के करीब भी लाता है।
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