Last Updated: September 23, 2026

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यमन में सत्ता संघर्ष ने लिया हिंसक रूप, सऊदी अरब ने UAE पर किए हवाई हमले, 20 की मौत

January 3, 2026

यमन में सत्ता संघर्ष ने लिया हिंसक रूप, सऊदी अरब ने UAE पर किए हवाई हमले, 20 की मौत

इंटरनेशनल डेस्क: यमन में सत्ता और प्रभाव को लेकर चल रही लड़ाई एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। शुक्रवार को सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समर्थित साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के ठिकानों पर जोरदार हवाई हमले किए। अलग-अलग रिपोर्ट्स के अनुसार इन हमलों में कम से कम 20 अलगाववादी लड़ाकों की मौत हो गई है।

खबरों के मुताबिक, सऊदी गठबंधन ने अल-खाशा और सेयून इलाके में मौजूद STC के सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है, जब यूएई पहले ही यमन से अपनी सेनाएं वापस बुलाने की घोषणा कर चुका है। न्यूज एजेंसियों के अनुसार यह पहली बार है, जब सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सीधे तौर पर STC के ठिकानों पर हमला किया है।

यमन के दक्षिणी हिस्से में तेजी से बदलते हालात ने देश के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सऊदी अरब और यूएई अब तक यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में एक साथ खड़े थे, अब आमने-सामने नजर आ रहे हैं। दोनों देश जमीन पर अलग-अलग गुटों का समर्थन कर रहे हैं, जिससे हालात और उलझ गए हैं।

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UAE समर्थित STC लंबे समय से दक्षिण यमन को अलग देश बनाने की मांग करता रहा है। हालिया घटनाओं के बाद इस दिशा में कदम तेज होते दिख रहे हैं। शुक्रवार को STC ने साफ कहा कि अब युद्ध शुरू हो चुका है। संगठन का आरोप है कि सऊदी समर्थित जमीनी बलों ने उस पर हमला किया और सऊदी वायुसेना ने हवाई हमलों के जरिए उनका साथ दिया। इस बयान से यमन में पहले से चल रही राजनीतिक और सैन्य अस्थिरता और गहरी हो गई है।

हवाई हमलों से सेयून एयरपोर्ट ठप

सऊदी गठबंधन के हवाई हमलों में सेयून शहर के एयरपोर्ट और वहां मौजूद सैन्य अड्डे को भी निशाना बनाया गया। इसके बाद एयरपोर्ट पर उड़ानों का संचालन पूरी तरह से रुक गया। 24 घंटे से ज्यादा समय तक न तो कोई विमान उतरा और न ही किसी उड़ान ने उड़ान भरी। हालांकि स्थानीय प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर एयरपोर्ट बंद होने की घोषणा नहीं की है। बताया जा रहा है कि दिसंबर की शुरुआत में STC ने हदरमौत और महरा प्रांत के कई इलाकों पर कब्जा कर लिया था। इन इलाकों में तेल से जुड़ी अहम सुविधाएं भी शामिल हैं। इसी के बाद से सऊदी समर्थित और यूएई समर्थित गुटों के बीच तनाव लगातार बढ़ता चला गया।

हमलों के बाद यूएई का बयान

हवाई हमलों से कुछ समय पहले ही सऊदी समर्थित बलों ने हदरमौत में सैन्य ठिकानों पर नियंत्रण पाने के लिए एक अभियान शुरू किया था। स्थानीय अधिकारियों का कहना था कि यह अभियान शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है। लेकिन अचानक हुए हवाई हमलों ने पूरे हालात बदल दिए। इसके बाद यूएई ने बयान जारी कर तनाव कम करने की अपील की और दावा किया कि उसकी आखिरी सैन्य टुकड़ी यमन से लौट चुकी है। इससे पहले यूएई ने आधिकारिक रूप से अपने सैनिकों की वापसी की पुष्टि की थी। यह फैसला तब लिया गया, जब सऊदी अरब ने यमन के बंदरगाह शहर मुकल्ला पर बमबारी की थी। सऊदी अरब का आरोप था कि वहां यूएई से आया एक जहाज हथियार लेकर पहुंचा है, जबकि यूएई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जहाज में सिर्फ वाहन थे, हथियार नहीं।

STC और सऊदी समर्थित नेताओं के अलग-अलग दावे

STC के एक सैन्य प्रवक्ता ने इस टकराव को अपने अस्तित्व की लड़ाई बताया। उनका कहना है कि यह संघर्ष कट्टरपंथी इस्लामवादी ताकतों के खिलाफ है, जिसे यूएई लंबे समय से अपने लिए बड़ा खतरा मानता रहा है। वहीं सऊदी समर्थित स्थानीय बलों का नेतृत्व कर रहे हदरमौत के गवर्नर सालेम अल खानबाशी ने कहा कि इसे युद्ध की शुरुआत नहीं माना जाना चाहिए। मकसद सिर्फ सैन्य ठिकानों पर नियंत्रण स्थापित करना है। STC के विदेश मामलों के प्रतिनिधि अम्र अल-बिध ने सऊदी अरब पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि शांतिपूर्ण अभियान की बात कहने के बावजूद कुछ ही मिनटों में कई हवाई हमले किए गए।

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यमन का पुराना गृहयुद्ध और नया संकट

यमन में गृहयुद्ध की शुरुआत साल 2014 में हुई थी, जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना समेत उत्तर यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब और यूएई की अगुआई में अरब देशों के गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया। इस लंबे युद्ध ने यमन को भारी तबाही, हिंसा और गंभीर मानवीय संकट की ओर धकेल दिया। हाल के वर्षों में हूतियों के साथ संघर्ष में कुछ हद तक स्थिरता आई थी, लेकिन अब हूती विरोधी गठबंधन खुद अंदर से बिखरता नजर आ रहा है। 2022 में बनाए गए प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) का मकसद सभी विरोधी गुटों को एकजुट करना था, लेकिन मौजूदा हालात में यह व्यवस्था कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।

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