इंटरनेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और संघर्ष के बीच एक अहम कूटनीतिक पहल सामने आई है। ईरान और अमेरिका ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दूसरे दौर की शांति वार्ता करने पर सहमति जताई है। यह बातचीत ऐसे समय हो रही है, जब क्षेत्र में सीजफायर लागू है, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।
कौन-कौन होगा शामिल?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वार्ता के लिए अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को भेजने का फैसला किया है। वहीं ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस बातचीत में हिस्सा लेंगे।
बातचीत का समय और पृष्ठभूमि
यह वार्ता उस समय हो रही है जब ईरान और हिजबुल्लाह के बीच चल रहे संघर्ष-विराम को तीन हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया है। हालांकि, 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद शुरू हुआ तनाव अभी भी खत्म होता नहीं दिख रहा है।
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व्हाइट हाउस का कहना है कि अमेरिकी दूत ईरानी प्रतिनिधियों से आमने-सामने बातचीत करेंगे। प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने उम्मीद जताई कि यह बैठक सकारात्मक रहेगी और किसी समझौते की दिशा में प्रगति हो सकती है। हालांकि, ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस बैठक में सीधी बातचीत की कोई योजना नहीं है। इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच अब भी कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
ईरान के प्रवक्ता के अनुसार, पाकिस्तान दौरे के बाद अब्बास अराघची ओमान और रूस का भी दौरा करेंगे, जहां वे युद्ध खत्म करने के प्रयासों पर चर्चा करेंगे।
पहले दौर की बातचीत क्यों रही नाकाम?
इससे पहले 11-12 अप्रैल को इसी शहर में पहला दौर आयोजित हुआ था, लेकिन वह किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। उस समय तीन बड़े मुद्दों ईरान का अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम और उसका परमाणु कार्यक्रम, Strait of Hormuz को फिर से खोलने का सवाल और लेबनान में इजराइल से जुड़ा सैन्य संघर्ष पर सहमति नहीं बन पाई थी।
क्या निकल सकता है नतीजा?
इस दूसरे दौर की वार्ता से उम्मीद की जा रही है कि दोनों देश कम से कम कुछ मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि कोई ठोस समझौता जल्द हो पाएगा या नहीं।
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