Last Updated: November 6, 2026

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बांग्लादेश में वरिष्ठ हिंदू पत्रकार पुलक चटर्जी की मौत, न्यूजरूम में फंदे से लटका मिला शव

September 12, 2026

बांग्लादेश में वरिष्ठ हिंदू पत्रकार पुलक चटर्जी की मौत, न्यूजरूम में फंदे से लटका मिला शव

ढाका: बांग्लादेशी दैनिक ‘समकाल’ के न्यूजरूम में वरिष्ठ हिंदू पत्रकार मृत पाए गए। बरिसल जिले के ब्यूरो ऑफिस में हुई इस घटना ने एक बार फिर अल्पसंख्यक सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शुक्रवार शाम को ‘समकाल’ के बारिसल ब्यूरो चीफ रहे 57 वर्षीय पुलक चटर्जी का शव अखबार के ऑफिस के अंदर फंदे से लटका मिला। घटना की पुष्टि करते हुए बारिसल कोतवाली मॉडल पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी अल मामून-उल इस्लाम ने कहा, “मौत की सही वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगी।”

स्थानीय सूत्रों के हवाले से बांग्लादेशी अखबार ‘ढाका ट्रिब्यून’ ने खबर दी है कि चटर्जी को करीब तीन साल पहले ‘समकाल’ से निकाल दिया गया था। वे बारिसल प्रेस क्लब के महासचिव भी रह चुके थे और इससे पहले कई सालों तक बांग्लादेशी अखबार ‘जुगांतर’ के साथ काम कर चुके थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटी हैं।

इस बीच, बांग्लादेश की अवामी लीग ने शनिवार को आरोप लगाया कि ‘समकाल’ ऑफिस में चटर्जी की मौत के हालात गंभीर सवाल खड़े करते हैं। पार्टी का कहना है कि उनके शव की लीक हुई तस्वीर से संकेत मिलता है कि यह स्वाभाविक मौत नहीं थी। पार्टी ने सवाल उठाया, “दोनों पैर जमीन पर हैं, घुटने मुड़े हुए हैं और शरीर लगभग सीधा है। कोई भी व्यक्ति स्वाभाविक रूप से इस स्थिति में मरकर नहीं गिरता। यह साफ तौर पर पूर्वनियोजित था। सवाल यह है कि इसे किसने अंजाम दिया? और उन्हें ऐसा क्यों करना पड़ा?”

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी)-जमात-ए-इस्लामी गठबंधन के 2001 से 2006 तक के पांच साल के शासन को याद करते हुए पार्टी ने कहा कि उस दौरान देश भर में अल्पसंख्यक समुदायों पर जो अत्याचार हुए थे, वे अब 2026 में फिर से देखने को मिल रहे हैं। पार्टी ने कहा, “मंदिरों पर हमले, घरों में आग लगाना, जमीन पर कब्जा, महिलाओं के खिलाफ बर्बर यौन हिंसा और अनगिनत हिंदुओं को बांग्लादेश छोड़ने के लिए मजबूर करना- वह मंजर आज 2026 में फिर हमारी आंखों के सामने आ रहा है। पुलक चटर्जी उस दौर में पत्रकार थे। उन्होंने जो हुआ उसे देखा, उसके बारे में लिखा, और वे इसके गवाह बने। उन्हें चुप कराने का मतलब इतिहास को चुप कराने की कोशिश करना है।”

अवामी लीग ने बीएनपी और जमात पर 2001-06 की घटनाओं को 2026 में दोहराने का आरोप लगाया। पार्टी का कहना है कि अल्पसंख्यकों का दमन, पत्रकारों का उत्पीड़न और असहमति की आवाजों को दबाना उनके शासन के तीन मुख्य स्तंभ थे। पार्टी ने कहा, “पुलक चटर्जी एक अल्पसंख्यक, एक पत्रकार और ‘समकाल’ के ब्यूरो चीफ थे। दूसरे शब्दों में, वे इन तीनों का प्रतिनिधित्व करते थे। उनकी हत्या का मतलब एक साथ इन तीनों को खत्म कर देना है।”

चटर्जी की मौत पर गहरी चिंता जताते हुए पार्टी ने कहा, “वे उस दौर के गवाह थे जब बीएनपी-जमात गठबंधन ने कथित तौर पर अल्पसंख्यकों के खून से बांग्लादेश की धरती को दागदार किया था। उन्हें चुप कराने का मतलब है उस गवाही को चुप करा देना। लेकिन सच को दबाया नहीं जा सकता। पुलक की मौत ने उस सच को और भी मजबूती से सबके सामने ला दिया है।”

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