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दक्षिण एशिया के लिए चीन का नया व्यापारिक प्रवेश द्वार बना शिगात्से

Shigatse becomes China's new trade gateway to South Asia

Shigatse becomes China's new trade gateway to South Asia

दक्षिण-पश्चिम चीन के शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश में शिगात्से नगर प्रशासन ने 14 जुलाई को ल्हासा में आयोजित 19वें एवरेस्ट सांस्कृतिक पर्यटन महोत्सव के एक संवाददाता सम्मेलन में अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि शिगात्से, हिमालयी आर्थिक सहयोग बेल्ट का मुख्य केंद्र और दक्षिण एशिया के लिए चीन का एक बड़ा प्रवेश द्वार है। शहर प्रशासन 2026 की राष्ट्रीय सीमा पार व्यापार सुविधा पायलट नीति का फ़ायदा उठाकर बंदरगाह सीमा शुल्क, सीमा-पार लॉजिस्टिक्स और सीमाई व्यापार को तेज़ी से बढ़ावा दे रहा है, ताकि इसे खुलेपन का एक नया और बड़ा केंद्र बनाया जा सके।

मिली जानकारी के अनुसार, ’14वीं पंचवर्षीय योजना‘ (2021-2025) के तहत शिगात्से ने 1 अरब 62 करोड़ युआन का भारी निवेश किया। इस निवेश से बंदरगाह के बुनियादी ढांचे से जुड़ी 65 परियोजनाओं को पूरा किया गया। इससे चिलोंग, चांगमु और लिज़ी जैसे तीन आधिकारिक बंदरगाहों और रिवु एवं छनथांग जैसे दो आरक्षित बंदरगाहों का एक बेहतरीन और व्यवस्थित ढांचा तैयार हो गया है। साथ ही, यहां के अंतरराष्ट्रीय लैंड पोर्ट (भूमि बंदरगाह) ने भी अपना परिचालन शुरू कर दिया है।

राष्ट्रीय स्तर पर पहला सीमा पार व्यापार सुविधा पायलट शहर होने के नाते, शिगात्से ने सीमा शुल्क (कस्टम) विभाग के साथ मिलकर 5 प्रमुख क्षेत्रों में 15 नए और आधुनिक कदम उठाए हैं। शहर ने एक ख़ास निगरानी मॉडल लागू किया है, जिसके तहत लैंड पोर्ट पर ही घोषणा, स्थानीय जांच और बंदरगाह पर सीधे पारगमन (डायरेक्ट ट्रांजिट)की सुविधा दी गई है। इससे चीन-नेपाल के बीच सीमा पार माल का आना-जाना अब पूरी तरह सुगम और नियमित हो गया है। रेल और सड़क के मिले-जुले नेटवर्क की वजह से दक्षिण एशियाई मालगाड़ियों का संचालन नियमित रूप से हो रहा है, जिससे शिगात्से से काठमांडू तक सामान पहुंचने का समय घटकर अब 4 दिन से भी कम रह गया है।

चिलोंग सीमा सहयोग क्षेत्र और शिगात्से अंतरराष्ट्रीय लैंड पोर्ट के ज़रिए व्यापार और उद्योगों का तालमेल बहुत मज़बूत हो रहा है। इससे न सिर्फ़ विदेशी व्यापार का दायरा बढ़ा है, बल्कि निर्यात के तरीके में भी बड़ा सुधार हुआ है। तिब्बती पठार के कृषि व पशुपालन उत्पाद और पारंपरिक हस्तशिल्प का निर्यात लगातार फल-फूल रहा है। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर बनी मोटरसाइकिलें और इलेक्ट्रॉनिक सामान नेपाल भेजे जा रहे हैं। वहीं, नई ऊर्जा वाले वाहनों (इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) और लिथियम बैटरियों जैसे महंगे उत्पादों का निर्यात भी काफ़ी तेज़ी से बढ़ रहा है। पिछले दो वर्षों में इन नए तीन उत्पादोंका बंदरगाह निर्यात 2 अरब युआन से भी ज़्यादा रहा है, जिसमें 19 हज़ार से अधिक नई ऊर्जा वाले वाहनों का निर्यात शामिल है।

दक्षिण एशियाई बाज़ार में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए, शिगात्से का मुख्य ध्यान नेपाली बाज़ार पर है। इसके साथ ही वह चीन-नेपाल ज़मीनी रास्ते के ज़रिए भारत और बांग्लादेश तक भी पहुंच रहा है। स्थानीय स्तर की ख़ास चीज़ों जैसे जौ, लहसुन और सेब के निर्यात के नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं। सोलर पावर (फोटोवोल्टिक ऊर्जा भंडारण) और नई ऊर्जा वाले वाहनों को दक्षिण एशिया भेजने के लिए ख़ास चैनल विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा, हल्की व रोज़मर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं और घरेलू हार्डवेयर के आयात-निर्यात का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है। कुल मिलाकर, एक ऐसी विविध दक्षिण एशियाई विदेशी व्यापार प्रणाली तैयार हो रही है, जहां स्थानीय कृषि उत्पाद इसकी बुनियादी रीढ़ हैं और नई ऊर्जा इस विकास को रफ़्तार देने वाला इंजन है। 

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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