2012 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद से, राष्ट्रपति शी चिनफिंग 1.4 अरब लोगों को “चीनी सपने” की ओर ले जा रहे हैं – अत्यधिक गरीबी का अंत, एक लक्ष्य जो पीढ़ियों से देश के लिए एक चुनौती रहा है। सीपीसी के नेतृत्व में गरीबी दूर करने में चीन की लड़ाई असंभव को संभव बनाने की कहानी है। 25 फरवरी, 2021 को आयोजित एक भव्य समारोह में, राष्ट्रपति शी ने अत्यधिक गरीबी के खिलाफ लड़ाई में चीन का “पूर्ण विजय” की आधिकारिक घोषणा की।
चीन के अन्य सभी हिस्सों की तरह, शीत्सांग (तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश ने भी 2021 में शीत्सांग की शांतिपूर्ण मुक्ति की 70वीं वर्षगांठ पर पूर्ण गरीबी उन्मूलन की घोषणा की, जो विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
शीत्सांग की उल्लेखनीय प्रगति: सामंती दासता से आधुनिकता तक:
चीन की दक्षिण-पश्चिमी सीमा पर स्थित, ‘विश्व की छत’ शीत्सांग प्राचीन काल से ही चीन का अभिन्न और अविभाज्य अंग रहा है। 1 अक्टूबर 1949 को चीन लोक गणराज्य (पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना) की स्थापना ने शीत्सांग सहित पूरे देश को आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में शामिल किया। आज, शीत्सांग एक समृद्ध और खुशहाल क्षेत्र है, जहां लोग अपने सपनों को पूरा कर रहे हैं। शीत्सांग ने कुछ ही दशकों में उछाल और विकास किया है।
शीत्सांग: प्रगति और समृद्धि के 75 वर्षों की यात्रा:
चीनी सरकार और पूरे देश की जनता के मज़बूत सहयोग से, शीत्सांग ने सामाजिक संकेतकों के हर क्षेत्र में—जैसे कि स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षित पेयजल, बिजली, रहने योग्य आवास और स्वच्छता सुविधाओं में—उल्लेखनीय प्रगति की है। शीत्सांग आज विकास के शिखर पर है। चीन की केंद्र सरकार के समर्थन, भीतरी इलाकों की सहायता और शीत्सांग की जनता की मेहनत से शीत्सांग का विकास जोरदार गति से हो रहा है, जिससे शीत्सांग के आम लोगों, गांववासियों, किसानों और चरवाहों के जीवन में व्यापक परिवर्तन आया है। 2025 में, शीत्सांग स्वायत्त क्षेत्र की अर्थव्यवस्था ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की, जब इसकी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 300 अरब युआन (43 अरब डॉलर) से अधिक हो गया। यह विकास की गति शीत्सांग के विकास की बढ़ती रफ़्तार को दर्शाती है।
धर्म की स्वतंत्रता: शीत्सांग में एक समृद्ध परंपरा
यहां यह उल्लेखनीय है कि धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता चीन लोक गणराज्य के संविधान में निहित एक बुनियादी राष्ट्रीय नीति है। शीत्सांग में तिब्बती बौद्ध धर्म, बोन, इस्लाम और कैथोलिक धर्म सहित कई अन्य धर्मों का सह-अस्तित्व है, जो इस तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में एक समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। शीत्सांग में वर्तमान में 1,787 तिब्बती बौद्ध धर्म स्थल हैं, जहां 46,000 से अधिक भिक्षु और भिक्षुणियां अपने पारंपरिक धार्मिक गतिविधियों का पालन करते हैं। विभिन्न देशों के कई प्रतिनिधियों ने धार्मिक परंपराओं को संरक्षित करने और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने के लिए चीन के प्रयासों की प्रशंसा की है, साथ ही ल्हासा शहर के आधुनिक विकास की भी सराहना की है।
छिंगहाई-शीत्सांग रेलमार्ग: शीत्सांग की प्रगति का प्रतीक:
रेलवे किसी भी देश की उन्नति के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जो आम जनता को एक सूत्र में बांधता है। छिंगहाई- शीत्सांग रेलमार्ग आधुनिक शीत्सांग की प्रगति का प्रतीक है। यह रेल मार्ग पश्चिमी चीन के बड़े विकास का प्रतीक है, जो दुनिया के सबसे ऊंचे पठार पर निर्मित सबसे लंबी रेल लाइन है। इस रेल मार्ग ने शीत्सांग को मातृभूमि चीन के अन्य इलाकों से जोड़ दिया है, जिससे शीत्सांग में आर्थिक और पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि हुई है। छिंगहाई- शीत्सांग रेल मार्ग से तिब्बती लोगों को बहुत लाभ मिला है, जिससे इस मार्ग पर पड़ने वाले क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।
शीत्सांग का उज्ज्वल भविष्य: विकास और समृद्धि की नई दिशा:
यह स्पष्ट है कि शीत्सांग का भविष्य उज्ज्वल है, जहां जातीय एकता और विकास की गति बनी रहेगी। 2026 में ऐतिहासिक शांतिपूर्ण मुक्ति की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर, शीत्सांग के लोग नए युग में और भी मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। “15वीं पंचवर्षीय योजना” (2026-2030) के तहत, शीत्सांग के लोग चीनी राष्ट्र के महान पुनरुत्थान के रास्ते पर अग्रसर हैं। आशा है, शीत्सांग का भविष्य एक उज्ज्वल सूर्योदय की तरह होगा, जिसमें समृद्धि और आशा की किरणें हर दिशा में फैलेंगी, जो चीनी समाजवाद की विजय का प्रतीक है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— रविशंकर बसु)
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