आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके इस्तेमाल के साथ-साथ दुरुपयोग आदि से पैदा होने वाली चुनौतियों को लेकर ध्यान आकर्षित हुआ है। सभी देश जानते हैं कि आज के दौर में एआई की भूमिका काफी अहम है। ऐसे में चीन और भारत भी इसके महत्व को समझते हैं। दोनों देशों ने इस बारे में अपने-अपने लक्ष्य निर्धारित किए हैं। जानकार कहते हैं कि चीन और भारत एआई में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
चीन की बात करें, तो वह एआई को प्राथमिकता दे रहा है। जाहिर है कि चीन ने एआई के महत्व को कुछ साल पहले ही समझ लिया था, इस संबंध में वर्ष 2017 में घोषणा की गयी थी, जिसमें साल 2030 तक एआई के क्षेत्र में वैश्विक ताकत बनने की इच्छा जताई गई थी। इसके लिए चीन में वर्ष 2027 तक 38 बिलियन डॉलर खर्च किए जाने की योजना है। माना जा रहा है कि चीन में हर साल इस क्षेत्र में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही, चीन ने कुछ समय पहले आर्टफिशियल इंटेलिजेंस पर निवेश फंड तैयार किया है, जिसके लिए शुरुआत में 8.2 बिलियन डॉलर जारी किए गए हैं।
अभी हाल में चीनी स्टार्टअप कंपनी ने चैटजीपीटी से अच्छा और उपयोगी डीपसीक लांच किया। जिसने पूरी दुनिया को आश्चर्य में डाल दिया है। हालांकि डीपसीक के अलावा भी चीन में कई दूसरे एआई टूल्स लांच किए जा रहे हैं। साथ ही, चीन में प्रतिदिन नई-नई कंपनियां खुल रही हैं। वे तकनीक और एआई के फील्ड में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
विशेषज्ञ इस बात पर विश्लेषण कर रहे हैं कि तमाम मुश्किलों के बावजूद चीनी कंपनियां इतना शानदार काम कैसे कर पा रही हैं। बता दें कि चैटजीपीटी को तैयार करने में करोड़ों डॉलर खर्च किए गए। लेकिन डीपीसीक इससे बहुत कम बजट में बना लिया गया, वह भी सिर्फ दो-तीन वर्षों के शोध और मेहनत के बाद। ऐसे में चीनी शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और तकनीशियनों की विश्व में साख मजबूत हो रही है। जिससे एआई के क्षेत्र में चीन एक बड़ी शक्ति के रूप में सामने आ रहा है। भविष्य में चीन में होने वाले नवाचार और शोध इसे साबित करेंगे।
वहीं, भारत के लिए भी एआई तमाम अवसर लेकर आया है। भारतीय विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह देश के समावेशी विकास को हासिल करने में एआई बहुत बड़ा रोल अदा कर सकता है। भारत के पास इस क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं, जिसमें लगातार निवेश भी बढ़ रहा है। कहा जा रहा है कि एआई का उचित इस्तेमाल कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, शहरी नियोजन और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में क्रांति ला सकता है। भारत की आईटी व तकनीक में बढ़ती क्षमता से भी इस संभावना को बल मिलता है। भारत में मेक इन इंडिया के अंतर्गत कई स्टार्टअप खुल रहे हैं, जो एआई और तकनीक से जुड़े हैं।
इससे पहले भारत सरकार ने जनवरी 2024 में इंडिया एआई मिशन लांच किया। इस बारे में भारत में गंभीरता से काम हो रहा है। हाल ही में, भारत के केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैश्णव ने एआई के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत डीपसीक जैसे ओपनसोर्स एआई को अपनाने के लिए तैयार है। साथ ही, भारतीय विशेषज्ञ भी इस दिशा में मेहनत से जुटे हैं, जिसका परिणाम आने वाले समय में दिखेगा।
जैसा कि हम जानते हैं कि भारत और चीन दोनों एशिया के बड़े और महत्वपूर्ण देश हैं। ऐसे में इन देशों को एआई को बढ़ावा देने और उसका विकास करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है। क्योंकि दोनों राष्ट्रों की बड़ी जनसंख्या और तकनीक संबंधी विशेषज्ञता एक-दूसरे के लिए उपयोगी हो सकती है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों 10-11 फरवरी को फ्रांस की राजधानी पेरिस में एआई एक्शन समिट का आयोजन हुआ, जिसमें विश्व के कई देशों के नेताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और जानकारों ने शिरकत की। शिखर बैठक फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रों और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सह अध्यक्षता में आयोजित हुई। जिसमें एआई के भविष्य और चुनौती व संभावनाओं पर व्यापक चर्चा की गयी। इस बैठक में भी चीन व भारत ने अहम रोल निभाया।
(अनिल पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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