
जिस तरह साइबर स्पेस से लेकर वास्तविक दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का हस्तक्षेप बढ़ रहा है, उससे मानव सभ्यता और जीवन में कई तरह के बदलाव दिखने लगे हैं। एआई एक तरफ जहां कठिन कार्यों को सहज बनाने की दिशा में सहयोग कर रहा है, वहीं जीवन में पारदर्शिता के बहाने गोपनीयता के साथ ही गरिमा पर भी सवाल उठा रहा है। ऐसे में चीन की ओर से “साझा, पारदर्शी, सहकारी, सुरक्षित और समावेशी डिजिटल और बौद्धिक भविष्य का निर्माण और साइबरस्पेस में साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण का संकल्प लेना महत्वपूर्ण कदम है। साइबर स्पेस में साझा और पारदर्शी भविष्य वाले समाज के निर्माण की कल्पना ही अपने-आप में अनूठी है।
इंटरनेट के बढ़ते प्रसार और दैनंदिन जीवन में उसकी लगातार बढ़ती दखल के बीच चीन ने इंटरनेट की दुनिया की चुनौतियों को समझने और उनका मुकाबला करने के लिए अपने वुचैन शहर में साल 2014 से ही लगातार ‘विश्व इंटरनेट सम्मेलन’ आयोजित कर रहा है। इस सम्मेलन के बारे में कह सकते हैं कि यह साइबरस्पेस में साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण का सामूहिक और बहुआयामी प्रयास है। इसके जरिए कोशिश यह की जा रही है कि डिजिटल बुनियादी ढांचे को सुरक्षित बनाया जाए, उसके समावेशी पहुंच को बढ़ावा दिया जाए और शासन व्यवस्था में इसके इस्तेमाल के साथ ही शासन में साइबर की दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मानदंडों का विकास किया जाए।
इसमें साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्षरता और सभी के लिए एक सुरक्षित और न्यायसंगत ऑनलाइन वातावरण सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी समाधान, कानूनी ढांचे और नैतिक आचरणों को साथ लाना भी शामिल है। इसका एक मकसद साइबर खतरों का मुकाबला करना और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना भी है। वुचैन सम्मेलन में 130 देशों और उनकी इंटरनेट से जुड़ी कंपनियों की हिस्सेदारी साबित करती है कि वैश्विक स्तर पर साइबर स्पेस की चुनौतियों को समझा जा रहा है, डिजिटल ठगी और रोबोटिक्स के जरिए मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को भी देखा-बूझा जा रहा है और उनके खतरों की चिंता भी बढ़ रही है।
भारत जैसे देश में डिजिटल ठगी, साइबर स्पेस में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा इन दिनों खूब बढ़ा है। इसे लेकर भारतीय समाज, शासन और पुलिस व्यवस्था चिंतित हैं और इससे उपजी चुनौतियों का सामना करने के लिए चौकसी भी कर रही हैं। विश्व इंटरनेट सम्मेलन की एक कोशिश साइबरस्पेस में कानून के शासन को बनाए रखना और सभी के लिए सुरक्षित और न्यायसंगत डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियम बनाना भी है। कहना न होगा कि वुचैन में इस दिशा में भी काम हुआ और विचार बढ़ा।
डिजिटल ने बराबरी की दुनिया तो दी है, लेकिन ऊंच-नीच की बजाय अलग तरह की सामाजिक खाई भी बनाई है। बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं अब भी पूरी दुनिया में साइबर पहुंच से कटे हुए हैं। साइबर स्पेस और इस वर्ग के बीच बढ़ी खाई को पाटने के लिए कमजोर समूहों के लिए डिजिटल कौशल और पहुंच में सुधार के लिए पहल को बढ़ावा देने पर भी वुचैन सम्मेलन में चर्चा-बात हुई। दुनियाभर की सरकारें अपने नागरिकों के बीच जारी डिजिटल विभाजन को पाटने और अधिक समावेशी डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने के लिए ई-कॉमर्स और डिजिटल व्यापार को सुगम बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। विश्व इंटरनेट सम्मेलन का एक हासिल यह भी है कि इस दिशा में वैश्विक स्तर पर तेजी लाई जाए।
साइबर सुरक्षा, 6 जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अगली पीढ़ी वाली ऐसी दूसरी प्रौद्योगिकियों में नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक मंच बनाने के अपने उद्देश्य को हासिल करने में भी अपने दस साल की यात्रा में विश्व इंटरनेट सम्मेलन ने बड़ी भूमिका निभाई है। साइबर सुरक्षा बढ़ाने और डिजिटल माध्यम से चल रही शासन व्यवस्था में सुधार के लिए ज्ञान और बेहतरीन परिपाटियों को साझा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भीतर संवाद और भागीदारी को भी प्रोत्साहित कर रहा है।
ऑनलाइन व्यवहार ने मानव जीवन पर भी गहरा असर डाला है। लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को गहरी चोट पहुंची है, जिसका नकारात्मक असर शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। वैसे डिजिटल उपकरण रोग निवारण और उपचार में मददगार साबित हो रहे हैं। इन संबंधों में डिजिटल उपकरणों के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना भी इस सम्मेलन का लक्ष्य रहा है। कहना न होगा कि यह सम्मेलन इस दिशा में भी काफी आगे बढ़ चुका है।
चीन की साइबर क्रांति इसका उदाहरण है। कोई भी व्यवस्था सार्वजनिक और आंतरिक अनुशासन के बिना नहीं चल सकती। चीन के सम्मेलन में भी यह मसला भी उठा है। बहरहाल इस सम्मेलन में डिजिटल साक्षरता और नैतिक आचरण को बढ़ावा देने की एक बार फिर कदम उठाने की बात की गई है। इसके साथ ही साइबर फ्रेंडली एवं जवाबदेह डिजिटल नागरिकता की वैश्विक उपस्थिति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कहना न होगा कि अकेले चीन ने अपनी इस एक दशक की यात्रा में साइबरस्पेस में एक समुदाय बनाने के लिए एक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया है जो वैश्विक इंटरनेट प्रशासन में चीनी समाधान और ज्ञान का योगदान देता है।
साइबर सुरक्षा और आपसी विश्वास को साइबर स्पेस में बढ़ावा देने के उद्देश्य से कुछ साल पहले पेरिस में सम्मेलन हुआ था, जिसमें एक अपील भी जारी की गई थी। इस अपील में कहा गया है कि साइबरस्पेस में विश्वास और सुरक्षा के लिए बहु-मंचीय ढांचा दुनिया ने अपनाया है, जिसका उद्देश्य साइबर सुरक्षा के बुनियादी मूल्यों को बढ़ावा देना है। इस दिशा में दुनियाभर की सरकारें काम भी कर रही है। इस बीच साइबर स्पेस को लेकर उठाए गए भारत सरकार के कदमों को भी याद किया जाना चाहिए।
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(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— उमेश चतुर्वेदी)
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