Last Updated: September 27, 2026

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ईरान समझौते को लेकर ट्रंप कर रहे विरोध का सामना, अपनी ही पार्टी में दिख रहा असंतोष

June 23, 2026

ईरान समझौते को लेकर ट्रंप कर रहे विरोध का सामना, अपनी ही पार्टी में दिख रहा असंतोष

वाशिंगटन: ईरान के साथ अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ज्ञापन समझौते की, डैमोक्रेट्स और रिपब्लिकन, दोनों पार्टियों ने लगातार आलोचना की। समझौते की आलोचना करते हुए लॉमेकर्स, पुराने अधिकारियों और नीति विशेषज्ञों ने सवाल उठाया कि क्या ईरान को इस समझौते से अमरीका से ज्यादा फायदा हुआ है। यह आलोचना तब हुई जब उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड में ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, ट्रंप सरकार के अधिकारियों ने इस डील का बचाव करते हुए इसे एक कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत बताया जिसका मकसद ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था।

सीबीएस के ‘फेस द नेशन’ पर संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि सरकार ईरान के साथ बातचीत को पूरी तरह से खुली आंखों से देख रही है और यह सुनिश्चित करने पर फोकस कर रही है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। वाल्ट्ज ने कहा, हमें इस प्रक्रिया को एक मौका देना होगा। हमें शांति को एक मौका देना होगा। उन्होंने तर्क दिया कि अमरीका बातचीत की मेज पर मजबूत स्थिति के साथ पहुंच रहा है और भविष्य में होने वाली किसी भी व्यवस्था की नींव भरोसे पर नहीं, बल्कि सत्यापन पर आधारित होगी। हालांकि, दोनों पार्टियों की तरफ से आलोचना हुई।

डैमोक्रेटिक सीनेटर कोरी बुकर ने एनबीसी के मीट द प्रैस को बताया कि वह इस समझौते का समर्थन नहीं करते और इसे एक तरह से सरैंडर बताया। बुकर ने कहा, ईरान को सारे फायदे मिलते हैं, सचमुच अरबों-खरबों डॉलर। यह उनकी बनाई हुई एक बहुत बड़ी नाकामी है। पूर्व रक्षा सचिव मार्क एस्पर ने भी सीजफायर और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने का स्वागत करने के बावजूद इस समझौते पर अपनी शंकाएं जताईं। एस्पर ने कहा, जब मैं समझौते को देखता हूं, तो इसमें कई ऐसे पॉइंट हैं जिनके बारे में मेरे मन में गंभीर सवाल और चिंताएं हैं।

मेरे हिसाब से बहुत सारे इंसेंटिव डील में बाद में देने के बजाय शुरू में ही दे दिए गए हैं। सीबीएस पर, रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने डिप्लोमेसी जारी रखने का समर्थन किया, लेकिन समझौते में कमियों को भी माना। ग्राहम ने एक भविष्यवाणी करते हुए कहा, अगर यह डिप्लोमैटिक कोशिश विफल हो जाती है, तो राष्ट्रपति ट्रंप होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जा कर लेंगे। हम इसे चलाएंगे। इस बहस ने ट्रंप की अपनी पार्टी के अंदर की फूट को भी सामने ला दिया।

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