Last Updated: September 22, 2026

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त्सांगमू जलविद्युत स्टेशन ने सफलतापूर्वक पूरा किया अंतिम स्वीकृति निरीक्षण

June 16, 2026

त्सांगमू जलविद्युत स्टेशन ने सफलतापूर्वक पूरा किया अंतिम स्वीकृति निरीक्षण

इंटरनेशनल डेस्क: चाइना पावर कंस्ट्रक्शन ग्रुप के अधीन छंगतु सर्वे एंड डिज़ाइन इंस्टीट्यूट कंपनी ने 15 जून को बताया कि शीत्सांग (तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश के पहले बड़े जलविद्युत स्टेशन, त्सांगमू जलविद्युत स्टेशन, के समापन और अंतिम स्वीकृति से जुड़ी बैठक हाल ही में आयोजित की गई।

विशेषज्ञों की टीम और पूर्णता स्वीकृति समिति की व्यापक समीक्षा के बाद, छंगतु कंपनी द्वारा डिज़ाइन और योजनाबद्ध इस परियोजना ने सभी निर्धारित डिज़ाइन मानकों और स्वीकृति आवश्यकताओं को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। इसके साथ ही त्सांगमू जलविद्युत स्टेशन, यारलुंग त्सांगपो नदी की मुख्य धारा पर पूर्णता स्वीकृति हासिल करने वाली पहली बड़ी जलविद्युत परियोजना बन गई है।

बैठक के दौरान विशेषज्ञ दल ने अपनी स्वीकृति रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में कहा गया कि परियोजना की सभी प्रमुख संरचनाएं स्वीकृत योजना और तय पैमाने के अनुसार पूरी कर ली गई हैं। जलाशय में पानी भरने की शुरुआत के बाद से यह स्टेशन 11 बाढ़ मौसमों का सुरक्षित तरीके से सामना कर चुका है।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रमुख संरचनाएं और मछली मार्ग सुविधाएं सामान्य रूप से काम कर रही हैं। वहीं, विद्युत-यांत्रिक और धातु संरचना उपकरण भी उत्पादन और संचालन की जरूरतों पर खरे उतरे हैं। मछली मार्ग व्यवस्था का प्रभाव भी संतोषजनक पाया गया। पूर्णता चरण के दौरान किए गए सभी विशेष परीक्षणों और निरीक्षणों को स्पष्ट स्वीकृति मिल गई है।

त्सांगमू जलविद्युत स्टेशन की स्थापित क्षमता 510 मेगावाट है, जबकि बांध की अधिकतम ऊंचाई 116 मीटर है। यह यारलुंग त्सांगपो नदी की मुख्य धारा पर बनाया गया पहला बड़े पैमाने का जलविद्युत स्टेशन है। इसका निर्माण सितंबर 2010 में शुरू हुआ था और अक्टूबर 2015 तक इसकी सभी उत्पादन इकाइयां चालू हो गई थीं।

अब तक यह स्टेशन 22.2 अरब किलोवाट-घंटे से अधिक बिजली का उत्पादन कर चुका है। इससे करीब 74 लाख टन मानक कोयले की बचत हुई है और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 2 करोड़ 22 लाख टन की कमी आई है। इससे छिंगहाई-शीत्सांग पठार के हरित विकास को भी मजबूती मिली है।

इस परियोजना के शुरू होने के बाद शीत्सांग क्षेत्र की महंगी तेल आधारित बिजली इकाइयों पर निर्भरता काफी हद तक समाप्त हो गई है। साथ ही, सर्दियों और वसंत ऋतु में बिजली की कमी की पुरानी समस्या को भी प्रभावी ढंग से कम करने में मदद मिली है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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