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ईरानी सेना ने ट्रंप का उड़ाया मजाक, कहा- “न अब समझौता करेंगे, न कभी, अमेरिका खुद से ही कर रहा बातचीत”

donald trump

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US Iran war: मध्य पूर्व की तनावपूर्ण स्थिति के बीच ईरान और अमेरिका के बीच बयानबाज़ी तेज़ होती जा रही है। हाल ही में ईरानी सेना ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे का तीखा मजाक उड़ाया है, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ “सकारात्मक और सार्थक बातचीत” होने की बात कही थी। ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान के साथ दो दिनों तक अच्छी बातचीत हुई, जिसके चलते अमेरिका ने अगले पांच दिनों तक किसी भी सैन्य कार्रवाई को रोकने का निर्णय लिया है। हालांकि, ईरान की ओर से इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है।

“अमेरिका खुद से ही बातचीत कर रहा है”
ईरानी सेना के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जोल्फगारी ने सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक बयान में अमेरिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमेरिका की कथित बातचीत वास्तव में एकतरफा है। जोल्फगारी ने तंज कसते हुए कहा, “ऐसा लगता है कि अमेरिका अब खुद से ही बातचीत कर रहा है। यदि वह वास्तव में वैश्विक महाशक्ति होता, तो अब तक इन जटिल परिस्थितियों से बाहर निकल चुका होता।”

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“रणनीतिक ताकत अब विफलता में बदली”
ईरानी प्रवक्ता ने आगे कहा कि जिस रणनीतिक शक्ति का दावा अमेरिका लंबे समय से करता रहा है, वह अब “रणनीतिक विफलता” में बदल चुकी है। उन्होंने अमेरिका की नीतियों को खोखला बताते हुए कहा कि अब दुनिया उनके दावों को गंभीरता से नहीं लेती।

समझौते के दावों पर भी उठे सवाल
ईरानी सेना ने अमेरिका के संभावित युद्धविराम प्रस्तावों को भी खारिज करते हुए कहा कि अपनी हार को समझौते का नाम देना उचित नहीं है। बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि अमेरिका आंतरिक मतभेदों से जूझ रहा है और इसी कारण भ्रमित संदेश दे रहा है। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब खबरें सामने आई थीं कि ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को एक 15-सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, ईरान ने इस तरह के किसी भी समझौते की संभावना से साफ इनकार किया है।

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“न अब, न कभी समझौता”
जोल्फगारी ने अपने बयान में सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “हमारा रुख शुरू से स्पष्ट रहा है और आगे भी रहेगा। हम आपके जैसे लोगों से न अब समझौता करेंगे, न कभी।”

बढ़ता कूटनीतिक तनाव
इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। जहां एक ओर अमेरिका बातचीत और समझौते की बात कर रहा है, वहीं ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में आने को तैयार नहीं है।

 

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