
कोलंबिया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर और संयुक्त राष्ट्र महासचिव के पूर्व विशेष सलाहकार जेफरी सैक्स ने हाल ही में चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) को दिए एक विशेष साक्षात्कार में चीन की विकास उपलब्धियों की खुलकर सराहना की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “चीन कोई खतरा नहीं है” और पश्चिमी देशों से आग्रह किया कि वे चीन की यात्रा कर वहां की वास्तविकता को स्वयं देखें ताकि चीन के प्रति उनकी समझ और गहरी हो सके।
प्रोफेसर सैक्स का चीन से गहरा संबंध चार दशकों से अधिक पुराना है। 1981 में अपनी पहली चीन यात्रा के बाद से वे चीन के सुधार और खुलेपन की प्रक्रिया, तकनीकी प्रगति और पूर्ण गरीबी उन्मूलन के ऐतिहासिक सफर के साक्षी रहे हैं। वे चीन के पश्चिमी भाग के विकास कार्यक्रम जैसी कई शोध परियोजनाओं में भी सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “मेरा विश्वास मेरे अपने अनुभव पर आधारित है। पश्चिमी विकास कार्यक्रमों से लेकर हुआवेई जैसी चीनी तकनीकी कंपनियों के उदय तक, चीन का विकास उम्मीदों से कहीं आगे निकल गया है।”
उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने बाज़ार की शक्तियों को सरकारी योजना के साथ जोड़कर एक ऐसा विकास मॉडल प्रस्तुत किया है, जिसने उच्च बचत, उच्च निवेश और सार्वभौमिक शिक्षा को संभव बनाया है। प्रोफेसर सैक्स के अनुसार, गरीबी उन्मूलन के इस मॉडल से पूरी दुनिया, विशेषकर अफ्रीकी देशों को महत्वपूर्ण प्रेरणा मिलती है।
चीन-अमेरिका संबंधों पर अपनी राय व्यक्त करते हुए सैक्स ने अमेरिका की नियंत्रण नीति की तीखी आलोचना की और उसे “बेतुका और निरर्थक” बताया। उन्होंने कहा कि चीन आज 150 से अधिक देशों का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और विज्ञान, तकनीक तथा शिक्षा के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता बन चुका है। चीन हर वर्ष लाखों विज्ञान और इंजीनियरिंग विशेषज्ञ तैयार कर रहा है, जिसके कारण वह वैज्ञानिक अनुसंधान में अग्रणी बना हुआ है।
सैक्स ने स्पष्ट कहा, “स्वस्थ प्रतिस्पर्धा यह दिखाने की होनी चाहिए कि कौन तकनीकी चुनौतियों का तेज़ी से समाधान कर सकता है, न कि प्रतिबंध लगाने या दूसरों को रोकने की।” उन्होंने टैरिफ और तकनीकी प्रतिबंधों के माध्यम से चीन को दबाने की अमेरिकी नीति को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया और कहा कि यह नीति अंततः अमेरिका के अपने नवाचार प्रयासों को भी कमज़ोर कर देगी।
बेल्ट एंड रोड पहल के प्रबल समर्थक सैक्स ने इस पहल को “21वीं सदी में सिल्क रोड के पुनर्निर्माण” की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया, जिसका मूल उद्देश्य सहयोग और संपर्क के माध्यम से साझा विकास हासिल करना है। उन्होंने खेद जताया कि अमेरिका ने न केवल इस पहल में सहयोग से इनकार किया, बल्कि अन्य देशों पर भी इसमें भाग न लेने का दबाव बनाया।
पश्चिम में चीन को लेकर मौजूद गलतफहमियों पर प्रतिक्रिया देते हुए सैक्स ने गंभीरता से कहा, “चीन जाइए और खुद देखिए! पश्चिम से पूरब तक, गांवों से शहरों तक वहां की जीवंतता और प्रगति को प्रत्यक्ष रूप से महसूस कीजिए।” उन्होंने इस पर ज़ोर दिया कि चीन का विकास किसी के लिए खतरा नहीं, बल्कि अवसर है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को शून्य-योग वाली सोच से आगे बढ़कर संवाद और सहयोग के माध्यम से साझा जीत की दिशा में काम करना चाहिए।
वैश्विक विकास के क्षेत्र में अपने व्यापक अनुभव का उल्लेख करते हुए सैक्स ने बताया कि वे अब तक 150 से अधिक देशों की यात्रा कर चुके हैं और उनका शोध सदैव वस्तुनिष्ठ तथ्यों पर आधारित रहा है। उन्होंने कहा, “मेरे अनुभव और अध्ययन यह दर्शाते हैं कि पूर्ण गरीबी के उन्मूलन की दिशा में चीन की 40 साल की यात्रा स्वयं में विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।” उन्होंने सभी राष्ट्रों से मतभेदों के प्रति सम्मान रखते हुए सहयोग पर जोर देने और जलवायु परिवर्तन तथा गरीबी जैसी वैश्विक चुनौतियों का मिलकर समाधान करने का आह्वान किया।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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