चीनी सीमा शुल्क विभाग ने हाल में एनवीडिया एच200 एआई चिप्स को चीन में प्रवेश करने से मना कर दिया। इस ख़बर से सेमीकंडक्टर उद्योग में बड़ी लहर पैदा हो गई। देखने में इसमें अंतरविरोध मौजूद है, क्योंकि चीनी बाज़ार में उच्च स्तरीय एआई चिप्स की बहुत ज़्यादा मांग है, लेकिन इस समय में चीन ने शीर्ष अंतर्राष्ट्रीय उत्पाद को “नहीं” कहा। विश्लेषण के बाद पता चलता है कि यह फ़ैसला चीन के चिप व्यवसाय में रणनीतिक परिवर्तन को दिखाता है।
चीन दुनिया में सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर आयातक देश था। उच्च स्तरीय एआई चिप्स लगभग पूरी तरह से एनवीडिया जैसी बड़ी कंपनियों पर निर्भर थे। हुआवेई की सप्लाई बंद होने का सबक अभी भी ताज़ा है। चीनी प्रौद्योगिकी कंपनियों को एहसास हुआ कि स्वतंत्र और नियंत्रणीय चिप तकनीक के बिना चाहे एआई एल्गोरिदम कितना भी आधुनिक हो, वह फिर भी हवाई महल है।
हाल के वर्षों में चीन के चिप उद्योग में चुपचाप बदलाव हो रहा है। उदाहरण के लिए कुछ एआई प्रशिक्षण परिदृश्य में हुआवेई के एसेंड910 चिप की क्षमता एनवीडिया ए100 का 80 से 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पाईतू और अलीबाबा आदि कंपनियों ने भी स्व-विकसित एआई चिप्स में प्रगति की। तकनीकी प्रगति से अंतर्राष्ट्रीय चिप आपूर्ति के सामने चीन ज्यादा आश्वस्त है।
आधिकारिक डेटा से पता चलता है कि वर्ष 2025 में चीन का चिप निर्यात 3 ख़रब 49 अरब 50 करोड़ यूनिट तक पहुंच गया, जो प्रतिदिन 96 करोड़ यूनिट था। वर्ष 2024 की तुलना में निर्यात की राशि में 27.4 प्रतिशत का इजाफा दर्ज हुआ, जो आयात की वृद्धि दर से बहुत अधिक है। और महत्वपूर्ण बात यह है कि निर्यात यूनिट के मूल्य में बड़ी बढ़ोतरी हुई। इससे जाहिर है कि चीन के उत्पाद लो-एंड से हाई-एंड की ओर बदल रहे हैं। चीन ने न सिर्फ़ बड़े पैमाने पर आपूर्ति प्राप्त की, बल्कि एआई त्वरक चिप और जीपीयू प्रतिस्थापन आदि क्षेत्रों में भी सफलता हासिल की। चीन ने एच200 चिप्स को इसलिए मना नहीं किया, क्योंकि चीन को इसकी ज़रूरत नहीं थी।
वहीं, इसके पीछे कई रणनीतिक विचार भी हैं। सबसे पहले, एआई चिप्स न केवल व्यापार से सम्बंधित है, बल्कि डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से भी सम्बंधित है। विदेशी चिप्स का इस्तेमाल करने से अप्रत्याशित सुरक्षा खतरा आ सकता है, विशेषकर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और प्रतिरक्षा के क्षेत्र में। उधर, उच्च स्तरीय चिप्स के आयात को सही तरीके से सीमित करने से चीनी चिप कंपनियों के लिए मूल्यवान बाजार स्थान और अनुप्रयोग परिदृश्य तैयार हुए। एनवीडिया के सीयूडीए इकोसिस्टम पर ज़्यादा निर्भरता करने से चीन का एआई उद्योग एक खास तकनीकी ढांचे में सीमित होगा। अब चीन की एआई चिप कंपनियां स्वतंत्र सॉफ्टवेयर पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में प्रयास कर रही हैं, जिसका सत्यापन और सुधार बाजार की ज़रूरत है।
चीन के एनवीडिया एच200 चिप्स को इनकार करने का मतलब यह नहीं है कि चीन अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का दरवाज़ा बंद करना चाहता है। चीन और अमेरिका के सेमीकंडक्टर उद्योग एक दूसरे पर घनिष्ठ रूप से निर्भर रहते हैं। पूरी तरह से अलग होना दोनों पक्षों के लिए नुकसानदेह होगा। चीन का यह निर्णय दुनिया को बताता है कि चीनी बाज़ार निष्पक्ष सहयोग का स्वागत करता है, लेकिन बिना किसी सीमा के बाहरी तकनीक पर निर्भर नहीं करेगा।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

