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उभरते देशों का विन-विन भविष्य   

December 18, 2023

उभरते देशों का विन-विन भविष्य   

आज की दुनिया में उभरते देशों की असाधारण शक्ति दिखने लगी है। इन देशों में अन्य विकासशील देशों की तुलना में अधिक विकसित वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताएं, अधिक प्रचुर प्रतिभाएं और एक मजबूत औद्योगिक आधार है। हालांकि, न ही वे पश्चिमी शिविर से संबंधित हैं। विस्तार होने के बाद अब ब्रिक्स देशों का आर्थिक पैमाना G 7 से भी बढ़ गया है, और विनिर्माण क्षमता के संदर्भ में उनका अधिक लाभ होता है। जिनमें चीन और भारत सबसे महत्वपूर्ण प्रतिनिधि हैं।

वास्तव में, पूंजी, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन का अनुभव पश्चिमी कंपनियों के लिए अद्वितीय नहीं है। दीर्घकालिक विकास के बाद, उभरती अर्थव्यवस्थाओं ने काफी ताकत हासिल कर ली है, और उनकी अपनी प्रौद्योगिकियां और विकास मॉडल पश्चिम से कम नहीं हैं। केवल ब्रिक्स और एससीओ सदस्यों की ताकत को देखते हुए, उनकी समग्र विनिर्माण क्षमताएं पश्चिम से कम नहीं हैं। पश्चिम के पास इतिहास द्वारा निर्मित राजनीतिक, मौद्रिक, तकनीकी और वित्तीय लाभ तो हैं, पर ये भी घट रहे हैं। यदि उभरती अर्थव्यवस्थाएं सहयोग के माध्यम से संयुक्त रूप से एक व्यापारिक माहौल बनाती हैं, तो उनकी स्थानीय कंपनियां उच्च-स्तरीय औद्योगिक श्रृंखलाओं की ओर बढ़ेंगी और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अधिक स्थान हासिल करेंगी।

यह भी चर्चितजनक है कि चीनी उद्यमों ने भारत में औद्योगिक आधार को मजबूत करने के लिए उल्लेखनीय योगदान भी दिया है। 1990 के दशक से, कई चीनी कंपनियों ने भारत के बिजली, मोबाइल फोन, फोटोवोल्टिक और फार्मास्युटिकल सहित उद्योगों में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। उदाहरण के लिए, चीनी बिजली कंपनियां भारत के लगभग आधे नए थर्मल पावर उत्पादन उपकरणों के निर्माण के लिए जिम्मेदार हैं, जिससे भारत की बिजली की कमी काफी हद तक कम हो गई है और बड़ी संख्या में स्थानीय तकनीशियनों के प्रशिक्षण में मदद मिली है। चीनी कंपनी द्वारा निर्मित गोड्डा पावर स्टेशन की यूनिट 2 भारत का पहला अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल कोयला आधारित पावर स्टेशन है। पावर स्टेशन में 82.56% की कर्मचारी स्थानीयकरण दर के साथ, चीन की कंपनी ने 40,000 से अधिक स्थानीय नौकरियां प्रदान करते हुए, बड़ी संख्या में भारतीय तकनीकी कर्मचारियों को भी प्रशिक्षित किया है। एक और उदाहरण यह है कि चीनी कंपनी ने हाल ही में बेंगलुरु मेट्रो कंपनी को ड्राइवर रहित सबवे परियोजना बनाने में मदद की है। चीनी तकनीशियन सिस्टम के लिए स्थापना और रखरखाव सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, और ट्रेन केबिन का कुछ हिस्सा चीनी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में भारत में निर्मित किया जाएगा।

यह देखा जा सकता है कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के पास पश्चिम के साथ प्रतिस्पर्धा करने की पूरी ताकत है। यदि वे ऐतिहासिक बाधाओं को दूर कर ठोस कार्रवाई करते हुए बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए आम योजनाएं बनाते हैं, तो वे आपसी व्यापार और अंतरसंबंध को काफी बढ़ावा देंगे। यदि हम दयालुता के साथ एक-दूसरे के प्रति अधिक खुले हों तो समस्याएं हल हो सकती हैं।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग) 

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