इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका में न्याय प्रक्रिया ने एक दर्दनाक घटना के बाद आखिरकार अपना अंतिम फैसला सुनाया। टेक्सास में मंगलवार को 49 वर्षीय मैथ्यू ली जॉनसन को 13 साल पहले किए गए जघन्य अपराध के लिए मौत की सजा दी गई। वर्ष 2012 में डलास के गारलैंड उपनगर की एक दुकान में डकैती के दौरान जॉनसन ने 76 वर्षीय महिला कर्मचारी नैन्सी हैरिस पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर उसे आग के हवाले कर दिया था।
यह घटना 20 मई 2012 को हुई थी, और नियति का संयोग देखिए कि 13 वर्ष बाद ठीक उसी तारीख को जॉनसन को हंट्सविले स्थित टेक्सास राज्य जेल में घातक इंजेक्शन देकर मृत्युदंड दिया गया। अधिकारियों ने उसे शाम 6:53 बजे मृत घोषित किया।
नैन्सी हैरिस, जिन्होंने उस दुकान में एक दशक से अधिक समय तक कार्य किया था, हमले के कुछ दिनों बाद इलाज के दौरान चल बसीं। उनकी मौत ने पूरे समुदाय को झकझोर कर रख दिया था। वे चार बेटों, 11 पोते-पोतियों और सात परपोते-पोतियों की दादी थीं।
-अदालत में कबूल किया अपराध
जॉनसन ने अदालत में स्वीकार किया था कि उसने नशे की हालत में अपराध को अंजाम दिया और उसे उस वक्त अपने कृत्य का पूरा अहसास नहीं था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, जॉनसन दुकान में लूटपाट के इरादे से घुसा था और हैरिस से पैसे मांगते हुए उसके सिर पर ज्वलनशील तरल डालकर आग लगा दी। वह पैसे लेकर आराम से बाहर निकल गया, जबकि हैरिस आग की लपटों में घिरी दुकान से भागकर मदद के लिए चीखती रही।
पास के एक पुलिस अधिकारी ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए आग बुझाई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चिकित्सकीय गवाहियों के अनुसार, हैरिस के शरीर का बड़ा हिस्सा गंभीर रूप से झुलस चुका था और उसे मरने से पहले अत्यधिक पीड़ा का सामना करना पड़ा।
-अंतिम शब्दों में पश्चाताप
जेल प्रशासन द्वारा दिए गए बयान के अनुसार, मौत से पहले जब जॉनसन से अंतिम शब्द कहने को कहा गया, तो उसने पीड़िता के परिजनों की ओर देखकर माफी मांगी और कहा कि उसका इरादा कभी किसी को नुकसान पहुंचाने का नहीं था।
यह मामला अमेरिकी आपराधिक न्याय व्यवस्था की उस लम्बी प्रक्रिया को दर्शाता है, जिसमें पीड़ितों के लिए देर से सही, लेकिन न्याय की उम्मीद बनी रहती है। नैन्सी हैरिस की मौत ने जिस तरह से एक समुदाय को झकझोरा, उसी तरह जॉनसन को दी गई यह सजा न्याय की उस उम्मीद की पुष्टि करती है, जो पीड़ा में भी दृढ़ बनी रहती है।

