हर वर्ष 1 मई को दुनियाभर में मजदूर दिवस या श्रमिक दिवस के रूप में मनाया जाता है। मजदूर दिवस मजदूर वर्ग के योगदान और उपलब्धियों को सम्मान देने और स्वीकार करने के लिए मनाया जाता है। यह उचित मजदूरी, सुरक्षित कार्य स्थितियों और श्रमिकों के अधिकारों की वकालत करने में श्रमिक आंदोलन के संघर्षों और लाभों को पहचानने का दिन है। यह दिन उन लाखों-करोड़ों मेहनतकश लोगों को समर्पित है जो समाज की नींव होते हैं — वे श्रमिक जो अपने हाथों की मेहनत से राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। श्रमिकों ने सिर्फ फैक्ट्रियों में पसीना नहीं बहाया, बल्कि अपने परिवारों, समाज और देश की आशाओं का बोझ भी अपने कंधों पर उठाया है। उन्होंने तकनीकी नवाचारों को जमीन पर उतारा, सड़कें बनाई, पुल जोड़े, और शहरों को गढ़ा। कोविड-19 जैसे संकटों के दौरान भी जब सब कुछ थम गया था, तब भी यही श्रमिक वर्ग था जिसने आवश्यक सेवाओं को जारी रखा।
भारत और चीन, दोनों ही देश एशिया के दो सबसे बड़े और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं हैं। इन दोनों देशों की तरक्की में श्रमिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। भारत एक कृषि-प्रधान और श्रम-प्रधान देश है। यहाँ की विशाल जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है — खेतों में, निर्माण स्थलों पर, फैक्ट्रियों में, ट्रांसपोर्ट और सेवा क्षेत्र में।
आज भारत आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में जिस ऊंचाई को छू रहा है, उसके पीछे श्रमिकों की दिन-रात की मेहनत है। भारत की अर्थव्यवस्था में भी मजदूरों का योगदान अतुलनीय है। कृषि से लेकर आईटी सेक्टर तक, भारतीय श्रमिकों ने देश को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। हाल के वर्षों में भारत सरकार ने श्रम सुधार के तहत चार नए लेबर कोड लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम मजदूरी और कार्यस्थल की सुरक्षा प्रदान करना है। हालांकि, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों तक इन सुधारों का लाभ पूर्ण रूप से पहुँचाना एक चुनौती बना हुआ है।
वहीं दूसरी ओर, चीन ने पिछले कुछ दशकों में अभूतपूर्व आर्थिक विकास किया है, जिसमें मजदूरों का योगदान सबसे महत्वपूर्ण है। 1980 के दशक से जब चीन ने “खुली अर्थव्यवस्था” (Open Economy) की दिशा में कदम बढ़ाया, तो गांवों से करोड़ों मजदूर शहरों की फैक्ट्रियों में काम करने आए। चीन की अर्थव्यवस्था को “विश्व की फैक्ट्री” कहा जाता है, और यह उपाधि वहाँ के करोड़ों श्रमिकों की मेहनत के कारण ही संभव हुई है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक देश है, जहाँ फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों ने इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, और मशीनरी उत्पादन में देश को शीर्ष पर पहुँचाया है। चीन ने हाई-स्पीड रेल, सड़कें, और स्मार्ट सिटीज जैसे प्रोजेक्ट्स में अद्भुत प्रगति की है, जिसमें निर्माण श्रमिकों का बहुत बड़ा हाथ है। चीनी सरकार ने श्रमिक कल्याण के लिए कई योजनाएँ बनाई हैं, जैसे न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल सुधार। चीन में श्रमिक यूनियनें सरकार के अधीन हैं, और स्वतंत्र श्रम आंदोलन को सीमित किया गया है। हालाँकि, सरकार ने हाल के वर्षों में मजदूरों की मजदूरी, स्वास्थ्य बीमा और काम के घंटे से जुड़े कानूनों को और मजबूत किया है। फिर भी श्रमिकों के अधिकारों के सवाल आज भी चर्चा में हैं।
श्रमिकों का योगदान: एक स्तुति
आज, जब हम विकास की बात करते हैं — स्मार्ट सिटी, हाईवे, bullet train, स्टार्टअप्स — तो उसके पीछे वही मेहनतकश लोग हैं जिनके हाथों में छाले हैं और आँखों में सपने। चीन और भारत दोनों ही देशों की आर्थिक तरक्की में मजदूरों का योगदान अमूल्य है। मई दिवस के अवसर पर हमें इन मेहनतकश लोगों के समर्पण और त्याग को सलाम करना चाहिए। सरकारों और समाज का कर्तव्य है कि वे श्रमिकों के हितों की रक्षा करें और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करें। मजदूर दिवस हमें यह याद दिलाता है कि कोई भी राष्ट्र तभी समृद्ध बन सकता है जब उसके श्रमिक वर्ग को सम्मान, सुरक्षा और उचित जीवन स्तर मिले। भारत और चीन को आगे बढ़ाने वाले इन सच्चे नायकों को हमारा नमन, और यह संकल्प कि हम उनके अधिकारों की रक्षा करेंगे।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—देवेंद्र सिंह)
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