जम्मू-कश्मीर डेस्कः प्रदेश में मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के लिए चिंताजनक खबर सामने आई है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत–सेहत योजना’ इस समय केंद्र शासित प्रदेश में गंभीर वित्तीय संकट से जूझती नजर आ रही है। निजी अस्पतालों और डायलिसिस सेंटरों का कहना है कि उनके करीब 60 फीसदी बिलों का भुगतान अब तक लंबित है।
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‘जम्मू-कश्मीर प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड डायलिसिस सेंटर्स एसोसिएशन’ के अनुसार, सरकार पर कई सौ करोड़ रुपये बकाया हैं। कुछ भुगतान तो वर्ष 2021 से ही अटके हुए हैं। अस्पतालों का कहना है कि लगातार देरी के कारण उनके लिए रोजमर्रा का संचालन करना मुश्किल होता जा रहा है। सबसे ज्यादा असर डायलिसिस सेंटरों पर पड़ा है, जहां मरीजों को नियमित इलाज की आवश्यकता होती है। लेकिन संसाधनों और मेडिकल सप्लाई की कमी के चलते इन सेवाओं को जारी रखना अब बड़ी चुनौती बन गया है।
क्या है असली समस्या?
एसोसिएशन का आरोप है कि मौजूदा ‘ट्रस्ट-आधारित मॉडल’ भुगतान निपटाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इसकी जगह ‘इंश्योरेंस-आधारित मॉडल’ लागू किया जाए, ताकि दावों का समय पर निपटारा हो सके। भुगतान में देरी का असर अस्पतालों की सप्लाई चेन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मेडिकल उपकरण, इम्प्लांट्स और दवाइयों की खरीद प्रभावित हो रही है, जिससे न केवल सामान्य इलाज बल्कि कैंसर और हृदय रोगों से जुड़े गंभीर ऑपरेशन भी प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
LG और मुख्यमंत्री से लगाई गुहार
बढ़ते संकट को देखते हुए एसोसिएशन ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द बकाया राशि जारी नहीं की गई तो केंद्र शासित प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
क्या है आयुष्मान भारत योजना?
साल 2018 में शुरू हुई ‘आयुष्मान भारत योजना’ दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में गिनी जाती है। इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाता है। हाल ही में केंद्र सरकार ने इस योजना का दायरा बढ़ाते हुए 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी बुजुर्गों को भी इसमें शामिल किया है।
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