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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा पहले होना चाहिए था : उमर अब्दुल्ला

Dharmendra Pradhan should have resigned earlier : जम्मू। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े को “बहुत पहले हो जाना चाहिए था” वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम का पूरा श्रेय उन छात्रों को जाता है जिन्होंने देशव्यापी NEET विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया और न्याय व जवाबदेही की अपनी मांग पर अडिग रहे।

“इस्तीफे का पूरा श्रेय छात्रों को जाए”

श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इस्तीफ़ा बहुत पहले आ जाना चाहिए था, क्योंकि यह मामला हफ़्तों से खिंच रहा था। उन्होंने कहा कि भले ही फ़ैसला देर से हुआ, लेकिन आख़िरकार यह “देर आए दुरुस्त आए” वाली बात है। मुख्यमंत्री ने साफ़ तौर पर कहा कि न तो राजनीतिक दलों और न ही किसी व्यक्ति को इस इस्तीफ़े का श्रेय लेना चाहिए; उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि छात्र ही अपनी अटूट दृढ़ता और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन के लिए पहचान और श्रेय के हक़दार हैं। उमर अब्दुल्ला ने कहा, “पूरा श्रेय छात्रों को जाता है।

सामूहिक हिरासत से नहीं रुकेगा उग्रवाद

वे एकजुट रहे, अपना शांतिपूर्ण विरोध जारी रखा और तब तक पीछे नहीं हटे जब तक उनकी आवाज़ सुनी नहीं गई।” जम्मू-कश्मीर में मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए, मुख्यमंत्री ने लगभग 2,500 से 3,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने से उग्रवाद का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। उन्होंने कहा कि सामूहिक रूप से लोगों को हिरासत में लेने का समाज पर व्यापक असर पड़ता है, जिससे हज़ारों परिवार प्रभावित होते हैं और लोगों में अलगाव की भावना पैदा होती है।

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