श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में स्वतंत्रता दिवस से पहले कश्मीरी पंडितों को कथित तौर पर मिली धमकी को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि धमकी किसने दी और इसका स्रोत क्या है।
पत्रकारों से बातचीत में फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था उपराज्यपाल (LG) के अधीन है। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि अब तक यह पता क्यों नहीं लगाया गया कि कथित धमकी कहां से आई और इसके पीछे कौन है। उन्होंने कहा, “यहां कुछ ठीक नहीं है।” अब्दुल्ला के मुताबिक, इस मामले में धमकी देने वाले व्यक्ति या संगठन की पहचान करना जरूरी है, ताकि उसकी सच्चाई और मकसद सामने आ सके।
फारूक अब्दुल्ला ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से भी मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल कश्मीरी पंडित समुदाय की सुरक्षा पर ध्यान देने के बजाय घाटी में रहने वाले सभी लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इस घटनाक्रम से हैरान हैं और इस मामले की पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए। उनके मुताबिक, धमकी के पीछे की परिस्थितियों और उसके उद्देश्य की जांच करना बेहद जरूरी है।
फारूक अब्दुल्ला की यह टिप्पणी उन रिपोर्टों के बाद आई है, जिनमें दावा किया गया था कि घाटी के उन इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है जहां कश्मीरी पंडित रहते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, एक कथित धमकी भरा पत्र सामने आया था। इसमें कथित तौर पर कश्मीरी पंडित समुदाय के कुछ लोगों के नाम और फोन नंबर शामिल थे। इसके बाद एहतियात के तौर पर कुछ पंडित कर्मचारियों को कुछ समय के लिए घर से काम करने की अनुमति दिए जाने की भी खबर है।
स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को देखते हुए जम्मू-कश्मीर में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है। ऐसे समय में कथित धमकी सामने आने के बाद संबंधित इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि इस मामले में सिर्फ धमकी में शामिल लोगों के नाम सामने आने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि धमकी वास्तविक है या नहीं, इसे किसने जारी किया और इसके पीछे क्या मकसद है। उन्होंने केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों से मामले की गहन जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की है।
📍 Location: Srinagar (Srinagar)