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सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका में ED की दलीलों पर 27 को High Court में सुनवाई

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में जेल में बंद आप मंत्री सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय की अंतिम दलीलों पर 27 फरवरी को सुनवाई करेगा। न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा एक अन्य जरूरी मामले के कारण ईडी के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस.वी. राजू की दलीलें नहीं सुन सके, इस पर न्यायाधीश ने कहा कि वह अगले हफ्ते एएसजी की दलीलें सुनेंगे।

एएसजी ने पहले तर्क दिया था कि मनी लॉन्ड्रिंग बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने कहा था, “उनका मामला यह है कि सत्येंद्र जैन का इससे कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन मुझे यह साबित करना है कि सत्येंद्र जैन इन चीजों में शामिल थे।” इससे पहले 13 फरवरी को हाईकोर्ट ने सत्येंद्र जैन और सह आरोपी अंकुश जैन और वैभव जैन की जमानत याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी थी।

8 फरवरी को, मंत्री के दो सहयोगियों अंकुश जैन और वैभव जैन की ओर से पेश अधिवक्ता सुशील कुमार गुप्ता ने न्यायमूर्ति शर्मा की पीठ के समक्ष अपनी दलीलें पूरी की थीं। उन्होंने तर्क दिया था कि वर्तमान मामले में, ईडी सिर्फ विधेय अपराध की जांच कर रहा है न कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले की। ईडी ने अनुमानित रूप से आय से अधिक संपत्ति (डीए) का मामला होने का दावा किया था, लेकिन यह उनका मामला नहीं हो सकता है, क्योंकि एजेंसी को पहले एक अनुसूचित अपराध के अस्तित्व को स्थापित करना होगा।

शीर्ष अदालत के विजय मदन लाल फैसले का हवाला देते हुए, गुप्ता ने तर्क दिया कि मौजूदा मामले में ईडी ने मुवक्किलों (अंकुश जैन और वैभव जैन) को जो भूमिका दी है वह सीबीआई मामले से अलग होनी चाहिए, लेकिन ईडी ने उन्हीं नियमों के तहत उन पर आरोप लगाया है। उन्होंने आगे तर्क दिया, “अपराध की आय वह मूल है, जिसे ईडी द्वारा अपने मुवक्किलों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए वर्तमान मामले में स्थापित करने की आवश्यकता है।” इससे पहले, गुप्ता ने अपने मुवक्किलों की ओर से कहा था: “हमें इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार कंपनी सत्येंद्र जैन की थी।” उन्होंने कहा था: “हम कह रहे हैं कि यह हमारी कंपनी है, सत्येंद्र जैन का कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है।”

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