जम्मू Pargwal : चिनाब नदी के तट तेजी से कट रहे हैं, जिससे आजीविका और पर्यावरण दोनों को खतरा है। फिर भी, परगवाल के चिब्बे मोहल्ला, अनसपुरा और गड़खल जैसे इलाकों में अवैध रेत माफिया अपनी खुली लूट जारी रखे हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिन- दहाड़े बड़े पैमाने पर, अनधिकृत खनन हो रहा है, ट्रकों और भारी मशीनों की लंबी कतारें खुलेआम चल रही हैं, जबकि प्रशासन आँखें मूंदे बैठा है। क्षतिग्रस्त तटबंध और कमजोर होते नदी तट बताते हैं कि यह सिर्फ आज का संकट नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आसन्न आपदा है।
विशेषज्ञ ने दी चेतावनी
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अवैध रेत खनन नदी के मार्ग को बदल देता है, उसके तटों को कमजोर करता है और मानसून के दौरान विनाशकारी बाढ़ का खतरा बढ़ा देता है। कभी चिनाब नदी को थामे रखने वाले ढाँचे और पत्थर अब बेतहाशा खनन का शिकार हो रहे हैं। निवासियों को अपने घरों और खेतों की सुरक्षा का डर है। क्या प्रशासन सो रहा है, या इसमें उसकी मिलीभगत है? क्षेत्र की गलियों और सार्वजनिक सभाओं में गूंजता एक आम सवाल बन गया है। पर्यावरण विशेषज्ञ आगे चेतावनी देते हैं कि बड़े पैमाने पर अवैध खनन न केवल नदी की पारिस्थितिकी को नष्ट करता है, बल्कि मृदा अपरदन, भूजल स्तर में गिरावट और जैव विविधता को भी नुकसान पहुँचाता है।
किसान और मछुआरे सबसे ज्यादा प्रभावित
किसान और मछुआरे, जो अपनी आजीविका के लिए चिनाब नदी पर निर्भर हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। नागरिक तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं—निरंतर निगरानी, अवैध उपकरणों की जब्ती, उल्लंघन करने वालों के लिए कठोर दंड और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के लिए एक ठोस योजना। तटबंधों का जीर्णोद्धार, पारिस्थितिक पुनर्वास और एक स्थायी खनन नीति के कार्यान्वयन की तत्काल आवश्यकता है। यह केवल प्रशासन की जि़म्मेदारी नहीं है। नागरिक समाज को भी इस अवसर पर आगे आना होगा। स्थानीय लोगों और युवाओं को जागरूक किया जाना चाहिए, और समुदायों को बिना किसी हिचकिचाहट के अधिकारियों और मीडिया को ऐसी अवैध गतिविधियों की सूचना देनी चाहिए।
मेष: दिन शुभ रहेगा...