Last Updated: October 9, 2026

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मनरेगा के खराब प्रदर्शन पर सरकार का बड़ा कदम, 4 जिलों के अधिकारियों की रोकी सैलरी

May 18, 2026

मनरेगा के खराब प्रदर्शन पर सरकार का बड़ा कदम, 4 जिलों के अधिकारियों की रोकी सैलरी

जम्मू-कश्मीर डेस्कः प्रदेश में मनरेगा के खराब प्रदर्शन पर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही की समीक्षा के दौरान चार जिलों का प्रदर्शन बेहद खराब पाए जाने के बाद ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनका वेतन रोकने के आदेश जारी किए हैं। सरकार की इस सख्ती के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

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विभाग की समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर संभाग के शोपियां और कुपवाड़ा तथा जम्मू संभाग के किश्तवाड़ और सांबा जिलों में मनरेगा के तहत रोजगार सृजन का प्रदर्शन तय लक्ष्य से काफी कम रहा। खासतौर पर पर्सनडेज यानी मजदूरों को उपलब्ध कराए गए रोजगार दिवसों का आंकड़ा बेहद निराशाजनक पाया गया। विभाग का कहना है कि कई बार निर्देश जारी करने और योजनाओं में तेजी लाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने अपेक्षित सुधार नहीं किया।

इन अधिकारियों का रोका वेतन

कार्रवाई में आने वाले अधिकारियों में शोपियां के एएसडी मुज्जफर अहमद शेख, कुपवाड़ा के अब्दुल राशिद गनई, किश्तवाड़ के मनोज कुमार और सांबा के रफीक अहमद शामिल हैं। विभाग ने इन सभी अधिकारियों का वेतन अगले आदेश तक रोकने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही संबंधित जिलों के उपायुक्तों को मनरेगा कार्यों की नियमित निगरानी करने और हर पखवाड़े प्रगति रिपोर्ट प्रशासनिक विभाग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

विभाग ने दी चेतावनी

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन पर लगातार नजर रखने के लिए प्रत्येक पखवाड़े प्रगति रिपोर्ट भेजना अनिवार्य होगा। विभाग ने चेतावनी दी है कि योजनाओं के संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भविष्य में आदेशों की अनदेखी या कार्यों में ढिलाई पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मनरेगा के खराब प्रदर्शन को लेकर सरकार का सख्त रुख

गौरतलब है कि इससे पहले भी मनरेगा के खराब प्रदर्शन को लेकर सरकार सख्त रुख अपना चुकी है। पिछले वर्ष पहली तिमाही की समीक्षा के दौरान करीब 80 बीडीओ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे और उनका मानदेय रोकने के निर्देश दिए गए थे। सरकार अब मनरेगा के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने, विकास कार्यों में तेजी लाने पर पूरा जोर दे रही है।

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