Jammu-Kashmir Weather update: कश्मीर में सर्दियों के सबसे कठिन 40 दिनों की शुरुआत, यानी चिल्ले कलां, ने ही पहला असर दिखा दिया है। घाटी के मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी के चलते ठंड ने लोगों को घरों में रोक दिया। श्रीनगर और आसपास के इलाकों में हल्की बारिश ने सड़कें गीली कर दी और बाजार का माहौल सुस्त पड़ गया।
मौसम विभाग ने बताया कि सोमवार और मंगलवार को भारी बर्फबारी की संभावना है। रविवार को श्रीनगर में अधिकतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.4 डिग्री कम था, जबकि न्यूनतम तापमान 4 डिग्री था, जो सामान्य से 6 डिग्री अधिक रहा।
#WATCH श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर: कश्मीर घाटी में तापमान में गिरावट के साथ शीतलहर जारी है। पर्यटक डल झील में शिकारा की सवारी का आनंद ले रहे हैं। pic.twitter.com/k5mj1CF0it
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 22, 2025
विभिन्न क्षेत्रों का तापमान
काजीगुंड: अधिकतम 6.6°C (सामान्य से 3.2°C कम), न्यूनतम 3.6°C (सामान्य से 5.9°C अधिक)
पहलगाम: अधिकतम 5.6°C (सामान्य से 2°C कम), न्यूनतम 2.8°C (सामान्य से 7.3°C अधिक)
गुलमर्ग: अधिकतम 3.4°C (सामान्य से 1.4°C कम), न्यूनतम -1.5°C (सामान्य से 3.5°C अधिक)
कुपवाड़ा में न्यूनतम तापमान 3.8°C, कोकेरनाग 3.3°C, जम्मू 11.5°C, बनिहाल 6°C, बटोत 7.1°C, कटड़ा 11.6°C और भद्रवाह 5.8°C दर्ज किया गया।
बर्फबारी और बारिश के आंकड़े
श्रीनगर घाटी के अधिकांश हिस्सों में रविवार को बारिश हुई। सबसे ज्यादा बारिश गुलमर्ग, श्रीनगर और पहलगाम में दर्ज की गई। गुलमर्ग में पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी के साथ मैदानी क्षेत्रों में भी बारिश हुई। रविवार शाम तक गुलमर्ग में 14.2 एमएम, श्रीनगर और पहलगाम में 13 एमएम, कुपवाड़ा में 11.9 एमएम और काजीगुंड में 3.6 एमएम बारिश हुई। जम्मू संभाग में जम्मू शहर में केवल 0.2 एमएम और बनिहाल में 10.1 एमएम बारिश दर्ज हुई।
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मौसम का पूर्वानुमान
मौसम विभाग के अनुसार 31 दिसंबर तक घाटी में बादल छाए रहेंगे। उत्तरी और मध्य कश्मीर के ऊंचे क्षेत्रों में बर्फबारी जारी रहने की संभावना है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में हल्का कोहरा छाए रह सकता है। नए साल पर भारी बर्फबारी का असर देखने को मिल सकता है।
चिल्ले कलां: सर्दियों का कठिन दौर
21 दिसंबर से शुरू होने वाले चिल्ले कलां के 40 दिन सर्दियों के सबसे कठोर माने जाते हैं। इस दौरान पहाड़ों पर भारी बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश आम होती है। प्रशासन, सेना और स्थानीय लोग इस दौरान सड़कें खुली रखने और जनजीवन प्रभावित न होने के लिए पहले से तैयार रहते हैं।
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