जम्मू कश्मीर डेस्कः महावीर चक्र से सम्मानित कर्नल सोनम वांगचुक का निधन हो गया है। उन्हें आज सुबह दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्होंने दुनिया को अलविदा कर दिया। कर्नल वांगचुक कारगिल युद्ध के सच्चे नायक थे। 1999 में हुए इस युद्ध के दौरान उन्होंने लद्दाख स्काउट्स की 4वीं बटालियन का नेतृत्व किया था। उन्हें ‘लद्दाख के शेर’ के नाम से जाना जाता था।
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भारतीय सेना के पूर्व कमांडर कर्नल वाई. के. जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर यह दुखद जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि कर्नल सोनम वांगचुक, MVC के अचानक निधन के बारे में जानकर गहरा दुख हुआ। आज सुबह दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। इस वीर सैनिक को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि। उनका समर्पण, बहादुरी और निस्वार्थ सेवा हमेशा याद रखी जाएगी।
कारगिल युद्ध के दौरान कर्नल वांगचुक ने चोरबाट ला दर्रे पर कब्जा कर भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक जीत दिलाई थी। उन्होंने लद्दाख स्काउट्स के जवानों का नेतृत्व करते हुए बेहद कठिन मौसम और विषम परिस्थितियों में दुश्मन को पीछे धकेला। ऊंचाई पर स्थित दुश्मन की चौकियों पर कब्जा करने में उनकी निर्णायक भूमिका रही, जिसके लिए उन्हें भारत के दूसरे सर्वोच्च सैन्य सम्मान ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया गया।
कर्नल सोनम वांगचुक का जन्म 11 मई 1964 को लद्दाख के लेह जिले के शंकर में हुआ था। उनके पिता 14वें दलाई लामा के सुरक्षा अधिकारी थे। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और बाद में भारतीय सेना की असम रेजिमेंट में शामिल हुए। उन्होंने लद्दाख स्काउट्स के इंडस विंग में भी सेवाएं दीं। अपने साहस और नेतृत्व के कारण उन्हें ‘लद्दाख का शेर’ कहा जाता था।
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