
कश्मीर: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को श्रीनगर के टैगोर हॉल में आयोजित बंटवारे की भयावहता स्मृति दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने वर्ष 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन में मारे गए, विस्थापित हुए और पीड़ित लाखों लोगों को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एलजी सिन्हा ने कहा कि बंटवारे का दर्द आज भी लोगों की यादों में मौजूद है। उन्होंने कहा कि विभाजन के पीड़ितों को याद करना केवल इतिहास को याद करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।
उन्होंने कहा कि बंटवारे के दौरान लाखों लोगों ने अपना घर, परिवार और जीवन खो दिया। उनके संघर्ष और बलिदान भारत की सामूहिक स्मृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि उन लोगों की कहानियों और यादों को सच्चाई और संवेदनशीलता के साथ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है।
एलजी सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर के लोगों से बंटवारे की भयावहता स्मृति दिवस को आत्मचिंतन, शांति, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के संकल्प के रूप में मनाने की अपील की। उन्होंने उन परिवारों के साहस को भी याद किया, जिन्होंने बंटवारे के बाद भारी मुश्किलों के बावजूद अपनी जिंदगी दोबारा शुरू की और देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि अतीत की गलतियों से सीखकर ही एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है।
मनोज सिन्हा ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (POJK) और छंब के उन लोगों का भी उल्लेख किया, जिन्हें संघर्ष और परिस्थितियों के कारण विस्थापन का सामना करना पड़ा।उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 से जुड़े दौर में कथित भेदभाव का सामना करने वाले लोगों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भेदभाव खत्म करने और लंबे समय से वंचित लोगों को समान अधिकार देने की दिशा में कदम उठाए गए।
एलजी सिन्हा ने 1947 के बंटवारे के बाद जम्मू-कश्मीर में हुए कबायली हमलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन हमलों के दौरान भारतीय सेना और स्थानीय लोगों ने बहादुरी से मुकाबला किया। उन्होंने कहा कि उस समय अनगिनत परिवारों ने संघर्ष और बलिदान दिया, जो जम्मू-कश्मीर की सामूहिक स्मृति का अहम हिस्सा है।
युवाओं को संबोधित करते हुए एलजी सिन्हा ने कहा कि उन्हें इतिहास से सीखना चाहिए और नफरत व सांप्रदायिक तनाव को दूर रखना चाहिए। उन्होंने युवाओं से समाज में भरोसा और एकता बढ़ाने की दिशा में काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जहां कभी विभाजन की दीवारें खड़ी हुई थीं, वहां युवाओं को भरोसे के पुल बनाने होंगे। उन्होंने एक ऐसे विकसित भारत के निर्माण पर जोर दिया, जिसमें सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ा जाए।
एलजी सिन्हा ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है। अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां, परंपराएं और मान्यताएं मिलकर भारत की पहचान बनाती हैं।उन्होंने लोगों से अपील की कि आने वाली पीढ़ियों को बंटवारे के दर्द और उससे मिली सीख के बारे में बताया जाए। साथ ही शांति, सद्भाव, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय एकता के लिए मिलकर काम किया जाए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर जम्मू-कश्मीर का निर्माण सभी की जिम्मेदारी है और राष्ट्रीय एकता देश की ताकत, सुरक्षा और विकास की नींव है।
कार्यक्रम के दौरान एलजी सिन्हा ने बंटवारे के दौरान हुई घटनाओं और लोगों की पीड़ा को दिखाने वाली फोटो प्रदर्शनी का भी दौरा किया। विभाजन में जान गंवाने वाले लोगों की याद में दो मिनट का मौन रखा गया। कलाकारों ने इस मौके पर एक भावनात्मक नाट्य प्रस्तुति भी दी। इसमें बंटवारे के दौरान लोगों के विस्थापन, संघर्ष, दर्द और मानसिक आघात को दर्शाया गया।
कार्यक्रम में J&K वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन डॉ. सैयद दरख्शां अंद्राबी, मुख्य सचिव अटल डुल्लू, अतिरिक्त मुख्य सचिव शालीन काबरा, संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव बृज मोहन शर्मा, बीजेपी J&K के संगठन महासचिव अशोक कौल सहित वरिष्ठ अधिकारी, नागरिक और बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे।
📍 Location: Srinagar (Srinagar)
मेष: दिन शुभ रहेगा...