Last Updated: October 22, 2026

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कश्मीर में फूलों की बहार : 3.5 लाख पौधों से सजा क्रिसेंथेमम गार्डन

October 22, 2026

कश्मीर में फूलों की बहार : 3.5 लाख पौधों से सजा क्रिसेंथेमम गार्डन

New Garden Aims to Boost Autumn Tourism : श्रीनगर। कश्मीर में पतझड़ के पर्यटन को नई पहचान देने के लिए क्रिसेंथेमम गार्डन पर्यटकों के स्वागत को तैयार है। इस खूबसूरत उद्यान में करीब 3.5 लाख फूलों वाले पौधे लगाए गए हैं, जिनके दिसंबर की शुरुआत तक खिले रहने की उम्मीद है।

फ्लोरीकल्चर विभाग की निदेशक मथूरा मासूम के अनुसार, गार्डन को रंग-बिरंगे फ्लावर बेड, वॉटर फीचर्स, पेर्गोला, सेल्फी पॉइंट और पर्यटकों की सुविधाओं से सजाया गया है। चिनार, मेपल और जिन्कगो के रंगीन पत्ते इसकी खूबसूरती को और बढ़ाएंगे। विभाग का लक्ष्य इस गार्डन को ट्यूलिप गार्डन की तरह लोकप्रिय बनाना है, ताकि कश्मीर में वसंत के साथ-साथ पतझड़ के मौसम में भी पर्यटकों की आमद बढ़े।

उम्मीद है कि दिसंबर की शुरुआत तक ये फूल खिले रहेंगे। श्रीनगर में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए, मासूम ने बताया कि इस गार्डन को बड़े फ्लावर बेड, रंग-बिरंगे फूलों की सजावट, वॉटर फीचर्स (पानी के फव्वारे आदि), पेर्गोला (छायादार ढांचे), सेल्फी पॉइंट और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाओं के साथ तैयार किया गया है। समाचार एजेंसी ‘कश्मीर न्यूज़ ऑब्जर्वर’ (KNO) के अनुसार, उन्होंने कहा, “यह हमारा ड्रीम प्रोजेक्ट है। हम चाहते हैं कि हमारे क्रिसेंथेमम गार्डन का महत्व और लोकप्रियता बिल्कुल हमारे ट्यूलिप गार्डन जैसी ही हो।

हम नहीं चाहते कि कश्मीर का कोई भी मौसम फीका रहे। वसंत का मौसम ट्यूलिप के लिए जाना जाएगा, और पतझड़ का मौसम क्रिसेंथेमम (गुलदाउदी) के लिए।” उन्होंने बताया कि इस गार्डन को मुख्य रूप से क्रिसेंथेमम को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है, जहाँ चिनार, मेपल और जिन्कगो जैसे पेड़ पतझड़ के रंग-बिरंगे नज़ारों में और चार चाँद लगा देते हैं। तैयारियों के दौरान मौसम से जुड़ी चुनौतियों का जिक्र करते हुए, मासूम ने कहा कि विभाग के अधिकारियों और बागवानों ने मिलकर इस प्रोजेक्ट को पूरा किया है।

उन्होंने बताया कि ये फूल लगभग डेढ़ महीने तक खिले रह सकते हैं और मौसम की स्थिति के आधार पर 5 या 6 दिसंबर तक बने रह सकते हैं। मासूम ने उम्मीद जताई कि पतझड़ के मौसम में यह गार्डन बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करेगा और पारंपरिक ट्यूलिप सीज़न के अलावा भी कश्मीर के पर्यटन को और अधिक मजबूत बनाएगा।

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