राजौरी: हर साल की तरह इस बार भी 13 अप्रैल को राजौरी दिवस मनाया गया। सेना और जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों ने राजौरी के गुजर मंडी चोक में शहीदों को श्रद्धांजलि दी। आज राजौरी के गुजर मंडी चौक में सेना और पुलिस के उच्च अधिकारियों ने अपने समारोह में वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर सेना के उच्च अधिकारियों के अलवाहा डीआईजी राजौरी पूंछ रेंज एसएसपी राजौरी और जिला आयुक्त राजौरी ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन बहादुर लोगों को अच्छा कार्य करने पर भी सम्मानित किया गया, वीर नारियों और पूर्व सैनिकों को भी सम्मानित किया गया।
गौरतलब है कि वर्ष 1947 में देश के विभाजन के समय बडे पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। 1947 की शुरु आत में पाकिस्तानी घुसपैठियों ने राजौरी के महत्वपूर्ण शहर पर कब्जा कर लिया। 12 अप्रैल,1948 को राजौरी की मुक्ति के लिए जवान आगे बढ़े। 13 अप्रैल,,1948 को राजौरी के बहादुर नागरिकों की सहायता से हमारे सशस्त्रबलों की वीरतापूर्ण कार्रवाई से राजौरी को घुसपैठियों से मुक्त कराया गया था। राजौरी की मुक्ति के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैन्य और नागरिक बहादुरों को श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल राजौरी दिवस मनाया जाता है।
इस दिन 37 असाल्ट फील्ड कंपनी के सैकंड लेफ्टिनाते आरआर राणे की वीरता को श्रद्धांजलि दी जाती है, जो नौशहरा से राजौरी तक सड़क को साफ करने के लिए बहादुरी से कार्य किया। करीब छह माह तक राजौरी शहर पर पाकिस्तानी कबाइलियों का कब्जा रहा। भारतीय सेना ने मार्चा संभाला, 13 अप्रैल, 1948 को दिलाई थी । राजौरी शहर को पाकिस्तानी सेना और कबायलियों के कब्जे से आजाद करवाने में भारतीय सेना के जवानों ने अद्म्य साहस का परिचय दिया था। इसमें भारतीय वायुसेना का योगदान भी सराहनीय था।
कई चुनौतियों को पार करते हुए भारतीय सेना के टैंक अचूक फायरिंग करते हुए नौशहरा से चिंगस और फिर वहां से राजोरी शहर में घुसे थे। इसके बाद आसपास की पहाड़ियों और राजौरी किले में मुक्त करवाया था। भारतीय सेना की वीरता के सामने पाकिस्तानी सेना और कबायली टिक नहीं पाए। इस तरह 13 अप्रैल,1948 को भारतीय सेना ने राजौरी को आजाद करवाया था। शहर की अवाम ने भी भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिला कर सहयोग दिया था। इसमें कई लोगों ने अपने प्राणों की आहुति भी दी थी। जिन लोगों ने आहुति दी थी उन्हें आज याद किया गया।
मेष: दिन शुभ रहेगा...