कलकत्ता : कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल किए जाने की मांग को लेकर एक आदिवासी संगठन के राष्ट्रीय राजमार्गों या रेलवे पटरियों को अवरुद्ध करने पर मंगलवार को रोक लगा दी। उच्च न्यायालय ने कहा कि यह मामला बड़े समुदाय से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकार के लिए उचित होगा कि वह इन लोगों की मांगों पर विचार करे। अदालत ने कहा कि यदि संभव हो तो सरकार संगठन के सदस्यों को चर्चा के लिये बुला सकती है, ताकि यह मुद्दा सुलझाया जा सके।
पीठ ने निर्देश दिया कि यदि इस आदेश का कोई उल्लंघन होता है, तो राज्य सरकार निर्देशों की अवहेलना करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई कर सकती है।इस पीठ में न्यायमूíत हिरण्मय भट्टाचार्य भी शामिल थे।
अदालत के समक्ष दायर एक जनहित याचिका में कहा गया है कि भारत जकात माझी परगना महल नामक एक अपंजीकृत संगठन ने अपने समुदाय को अनुसूचित जनजाति आरक्षित श्रेणी में शामिल करने, संथाली माध्यम शिक्षा बोर्ड के गठन और अन्य संबंधित मुद्दों को लेकर आंदोलन की योजना बनाई है। आंदोलन का आह्वान करने वाले प्रतिवादियों के वकील ने अदालत के समक्ष पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को मांगों के साथ 30 अक्टूबर को दिए गए अपने ज्ञपन की एक प्रति पेश की।ज्ञपन में यह भी कहा गया कि यदि 15 दिसंबर तक उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर देंगे, जिसमें हजारों आदिवासी लोग शामिल होंगे।

