नेशनल डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया। केंद्र सरकार ने पूरे देश में जातिगत जनगणना कराने का निर्णय किया है। यह जनगणना 94 साल बाद होने जा रही है। पिछली बार 2011 में जातियों की गिनती की गई थी, लेकिन उस समय के आंकड़े कभी सार्वजनिक नहीं हुए थे। अब मोदी सरकार की यह घोषणा देश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गई है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
जाति जनगणना पर शुरू हुआ ‘क्रेडिट वॉर’…
सरकार के इस फैसले के बाद देश में क्रेडिट लेने की होड़ मच गई है। कांग्रेस ने इसे राहुल गांधी की जीत बताया है और पटना में उनके पोस्टर लगाए हैं, जिन पर लिखा है – “सरकार किसी की हो, सिस्टम गांधी का ही चलेगा।” वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है और पटना की सड़कों पर लालू यादव और तेजस्वी यादव को धन्यवाद देने वाले पोस्टर लगाए गए हैं। दिल्ली में भी कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी के पोस्टर के साथ लिखा – “झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।”
विपक्ष के आरोपों का BJP ने दिया जवाब
विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाओं पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जाति जनगणना का फैसला होते ही कुछ लोग भड़क गए और कहने लगे कि “सरकार उनकी है, सिस्टम हमारा है।” प्रधान ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पंडित नेहरू जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ थे, और राजीव गांधी ने भी ओबीसी आरक्षण के खिलाफ संसद में भाषण दिए थे। उन्होंने याद दिलाया कि मंडल आयोग की रिपोर्ट को कांग्रेस सरकार ने 10 साल तक दबाकर रखा, और जब वीपी सिंह की सरकार ने उसे लागू किया, तो उसमें भी भाजपा की भूमिका थी। उन्होंने कांग्रेस को वंचितों, दलितों और पिछड़ों के खिलाफ पार्टी बताया और कहा कि अब उनका पाखंड सामने आ गया है।
आजाद भारत में पहली बार जातिगत जनगणना
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस फैसले की जानकारी दी और बताया कि यह आजाद भारत में पहली बार है जब केंद्र सरकार जातिगत जनगणना कराएगी। उन्होंने कहा कि जनगणना में सभी जातियों की गिनती की जाएगी। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह जाति जनगणना के मुद्दे का अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करती रही है, लेकिन खुद कभी इसे गंभीरता से नहीं लिया।

